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किताब, कॉपी, पेंसिल और स्याही महंगी

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आगरा। पढ़ाई भी महंगी हो गई है। पिछले साल के मुकाबले स्कूल की किताबें ही नहीं कॉपियां और स्टेशनरी के अन्य सामान पेंसिल, स्याही आदि के दाम भी 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। अभिभावकों कॉपी-किताब और स्टेशनरी पर एक बच्चे के लिए आठ से 12 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। पहले यह सामान छह हजार रुपये तक में मिल जाता था।
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पुस्तक विक्रेता इसके लिए कागज पर 12 और स्याही पर 18 प्रतिशत जीएसटी बढ़ना कारण बता रहे हैं। उनका कहना है कि जीएसटी बढ़ने पर उनका जोर नहीं है, ऐसे में दाम तो बढ़ना तय है। कॉपियां महंगी हुई हैं तो उनके पेज भी कम कर दिए गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह दोहरी मार है। पहले जिस कॉपी में 128 पेज थे अब वह घटकर 120 ही रह गए हैं। कुछ कॉपियों की लंबाई और चौड़ाई कम हो गई है। पेंसिल की लंबाई में भी अंतर आया है। पिछले साल 10 रुपये में आने वाला पेन अब 15 में, रबर एक की बजाय दो रुपये में आ रही है।
कागज के दाम बढ़ने से दाम बढ़ाए गए
लोहामंडी स्थित स्टेशनरी विक्रेता मनीष डेम्बला ने बताया कि कागज के बढ़ते दामों की वजह से कॉपी-किताबों के दामों में वृद्धि हुई है। जीएसटी की दरों में वृद्धि भी इसका एक कारण है।ब्रांडेड कंपनियों ने कॉपियों ने पन्ने कम कर दिए हैं। पेंसिल के अलावा अन्य सामानों पर भी दाम बढ़े हैं। जुलाई में नया स्टॉक आने के बाद दामों पर और फर्क पड़ सकता है।
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शिक्षा सामग्री महंगी होने से बिगड़ा बजट
इस साल बच्चे का दाखिला सातवीं कक्षा में कराया है। सोचा था जितने पैसे में पहले पढ़ाई शुरू हो जाती थी उतने में ही हो जाएगी, लेकिन इस बार किताब-कॉपी से लेकर स्कूल की ड्रेस तक इतनी महंगी हो गई है कि बजट गड़बड़ा गया। किताबों का सेट पर तो दोगुना दाम हुए ही हैं, स्टेशनरी की महंगाई भी जेब हल्की कर रही है।
-मनोज कुशवाह, अभिभावक
छह हजार का सामान 12 हजार में मिला
जो बस्ता पिछले साल छह से सात हजार रुपये में बंध रहा था। इस साल वह 11 से 12 हजार रुपये में तैयार हुआ है। कॉपी-किताब, स्टेशनरी का ऐसा कोई भी सामान नहीं है जिस पर पैसे न बढ़े हों। कॉपियों के पेज कम होने से दोहरी मार पड़ी है। पढ़ना-लिखना अब तो बहुत ही महंगा हो गया है।
- शशिकांत चौरसिया, अभिभावक
स्टेशनरी के हर सामान पर दाम बढ़े हैं
शिक्षा सामग्री महंगी होने से हर किसी को फर्क पड़ रहा है। स्टेशनरी के पेंसिल, रबर, कलर आदि ने लेकर कोई भी सामान ऐसा नहीं है जिस पर पैसे न बढ़े हों। कक्षा सात में बच्चे का दाखिला कराया है। जिसकी शिक्षा सामग्री इस बार 12 से 13 हजार रुपये की पड़ी है। जो अब तक ज्याद से ज्यादा छह हजार रुपये में आ जाती थी।
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- मोहम्मद फैसल, अभिभावक
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