मैनपुरी। जिला अस्पताल में खून की प्रमुख जांचें पिछले तीन महीने से बंद हैं। इससे मरीजों को प्राइवेट पैथॉलॉजी सेंटर पर जांच करानी पड़ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मरीजों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में खून की जांच की व्यवस्था नहीं है। इससे मरीजों को बाहर से जांच करानी पड़ रही है। 31 मार्च तक जिला अस्पताल में यूपीएचएसएसपी के तहत खन्ना पैथॉलॉजी को संबद्ध किया गया था। इसका संबद्धीकरण समाप्त होने के बाद तीन महीने में भी विभाग और शासन मिलकर किसी लैब से संबद्धीकरण नहीं कर पाया।
इसके यहां आने वाले मरीजों को खून की जांच के लिए भटकना पड़ रहा है। जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को बाहर से जांचें करानी पड़ रही हैं। जहां उन्हें शारीरिक दिक्कतों के साथ ही आर्थिक परेशानी भी झेलनी पड़ रही है। निजी लैब संचालक जांचों के नाम पर मनमानी रकम वसूल कर रहे हैं।
100 से 150 मरीजों की हर रोज होती है बाहर से जांच
जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डालें तो प्रतिदिन 100 से 150 मरीजों को अस्पताल से बाहर जांच करानी पड़ रही है। जबकि पूर्व में जिला अस्पताल में ही इन जांचों की व्यवस्था थी।
500 से दो हजार रुपये तक हो रहे खर्च
पूर्व में जिला अस्पताल में यूपीएचएसएसपी के तहत संचालित खन्ना लैब में जो जांचें निशुल्क थीं उन्ही जांचों के लिए अब मरीजों को प्राइवेट लैब पर 500 से दो हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्राइवेट लैब की जांच पर मरीजों को उतना भरोसा भी नहीं है।
दूसरे पैथॉलॉजी से जांच कराई
नगर के गोपीनाथ अड्डा निवासी हर्षित त्रिपाठी जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित होने पर भर्ती हैं। हर्षित ने बताया कि जिला अस्पताल में पर्याप्त जांच की व्यवस्था न होने के कारण उसने गोपीनाथ अड्डा स्थित एक जांच केंद्र से जांच कराई है। जहां उसे 250 रुपये खर्च करने पड़े।
बाहर जांच में वसूले गए 300 रुपये
गांव शिवरार निवासी सपना सिंह भी जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित होने पर भर्ती कराई गई हैं। सपना ने बताया कि जिला अस्पताल में जांच की उचित व्यवस्था न होने पर बाहर से जांच करानी पड़ी है। जहां उससे 300 रुपये वसूले गए हैं।
इन जांचों के लिए भटक रहे मरीज
-थाइराइड, विटामिन सी, विटामिन डी, किडनी फंक्शन टेस्ट केएफटी, लीवर फंक्शन टेस्ट एलएफट, एचआईवी वीडीआरए, यूरिन कल्चर।
शासन स्तर पर एक निजी लैब से संबद्धीकरण की बात चल रही है। उम्मीद है कि अगले महीने तक संबद्धीकरण हो जाए। तब मरीजों को निशुल्क जांच का लाभ मिल सकेगा।
-डॉ. आरके सागर, सीएमएस।