फिरोजाबाद के तत्कालीन ब्लाॅक प्रमुख और उनके अंगरक्षक की हत्या के केस में अदालत ने फैसला सुनाते हुए दोषी संजय दीक्षित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सनक सिंह यादव के परिवारीजनों का कहना है कि दूसरे आरोपी अजय दीक्षित के खिलाफ 35 वर्ष बाद भी चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
फिरोजाबाद के ब्लाॅक प्रमुख स्व. चौधरी सनक सिंह यादव एवं सुरक्षाकर्मी श्रीनिवास हत्याकांड में दोषी संजय दीक्षित को न्यायालय की ओर से आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अजय दीक्षित के खिलाफ 15 अप्रैल 1993 को भेजी गई चार्जशीट अभी तक न्यायालय में दाखिल नहीं की गई। पुलिस प्रशासन का यह रवैया यह दर्शाता है कि वह विपक्षियों को बचाने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि लड़ाई अभी आगे लड़ी जाएगी।
विज्ञापन
थाना उत्तर क्षेत्र गांधीनगर निवासी तत्कालीन ब्लॉक प्रमुख चौधरी सनक सिंह यादव एवं उनके अंगरक्षक श्रीनिवास की 25 अगस्त 1989 को गोपाल आश्रम प्रांगण में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाद में दोनों की मौत हो गई थी। इस मामले में संजय दीक्षित, उसके भाई अजय दीक्षित एवं अशोक दीक्षित निवासी मोहल्ला गंज थाना उत्तर के खिलाफ अभियोग दर्ज कराया था। इस मुकदमे में अपर जिला जज कोर्ट नंबर 15 राजीव कुमार पालीवाल की अदालत ने संजय दीक्षित को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ 75 हजार का अर्थदंड लगाया है।
इस मुकदमे की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित यादव ने बताया कि इस मुकदमे में 4 अक्तूबर 1989 को अशोक दीक्षित, अजय एवं संजय दीक्षित के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। इसके बाद 26 अक्तूबर 1989 को चार्जशीट अशोक दीक्षित तथा संजय दीक्षित के खिलाफ दाखिल की गई थी। जबकि अजय दीक्षित के खिलाफ 15 अप्रैल 1993 को भेजी गई चार्जशीट अभी तक दाखिल नहीं की गई।
अधिवक्ता मोहित यादव का कहना है उक्त चार्जशीट को तत्कालीन एडीजी जमील मिर्जा ने रिसीव की थी। आखिर पुलिस एवं प्रशासन ने अभी तक किसी के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं की। पुलिस प्रशासन का यह रवैया स्पष्ट करता है कि इस हत्याकांड के दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा इस मामले में हाईकोर्ट में ले जाकर दोषियों को सजा दिलाने का काम करूंगा।
विपक्षियों से जान का खतरा, प्रशासन मुहैया कराए सुरक्षा
तत्कालीन ब्लाॅक प्रमुख चौधरी सनक सिंह यादव एवं उनके सुरक्षाकर्मी की हत्या में पैरवी कर रहे बेटे विजेंद्रपाल सिंह यादव एवं उनके पौत्र चौधरी संजय यादव ने कहा कि मुकदमे की लगातार पैरवी हमारे चाचा एवं मेरे द्वारा की जा रही है। आरोपी पक्ष शातिर अपराधी होने के साथ अशोक दीक्षित के खिलाफ 80-80 मुकदमे दर्ज हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह बाहर घूम रहे हैं। सजा होने के बाद वह मेरी अथवा परिवार की हत्या करा सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह सुरक्षा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि कई बार प्रशासन को हम लोग लिखित में सुरक्षा की मांग कर चुके हैं। पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। हमारे साथ कोई घटना होती है तो उसके लिए पुलिस प्रशासन ही जिम्मेदार होगा। संजय यादव ने कहा कि अशोक दीक्षित एवं उसके भाई को सजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाने का काम करेंगे।