साइकोट्रोपिक दवाओं का नशे के आदी लोग दुरुपयोग कर रहे हैं। इससे इन दवाओं की कालाबाजारी बढ़ी है। अधिक आमदनी के चलते बिना बिल के ये दवाएं दस गुना कीमत पर बेचीं जा रही हैं। हाल ही में दिल्ली की सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स, प्रिवेंटिव एंड इंटेलीजेंस सेल ने कोसीकलां में ऐसी फर्म पकड़ी है। वहीं, इन दवाओं की कालाबाजारी को रोकने के लिए आगरा में 38 मेडिकल स्टोरों की जांच की जा रही है। जिससे साइकोट्रोपिक दवाओं की खरीद-बिक्री में लिप्त रैकेट पर अंकुश लगाया जा सके।
दिल्ली, मुंबई के अलावा बांग्लादेश तक की जा रही कालाबाजारी
आगरा जिला केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा ने बताया कि मानसिक रोगों के इलाज में साइकोट्रोपिक दवाएं दी जाती हैं। इन दवाओं को नशे के लिए लोग उपयोग कर रहे हैं। इन दवाओं से किसी तरह की गंध नहीं आती और डोज बढ़ाने से मनमाफिक नशा होता है। इसी के चलते दवा माफिया इनकी कालाबाजारी कर रहे हैं।
बिल से दवाओं का पूर्ण विवरण और डॉक्टरी पर्चे पर मिलती हैं। ऐसे में बिना बिल के भारी मात्रा में इनकी कालाबाजारी दिल्ली, पुणे, मुंबई, बिहार, बंगाल और बांग्लादेश तक की जा रही है। रेव पार्टियों में इनकी सबसे ज्यादा मांग रहती है। इन दवाओं की 10 टेबलेट के स्ट्रिप की दवा 10 से 20 रुपये तक होती है, बिना बिल के ये 100 से 200 रुपये तक बेचते हैं।
इस काम आतीं हैं साइकोट्रॉपिक दवाएं
आगरा फार्मा एसोसिएशन के पुनीत कालरा ने बताया कि साइकोट्रोपिक दवाओं का मेंटल डिसआर्डर के मरीजों के इलाज में उपयोग की जाती हैं। ये न्यूरो ट्रांसमीटर्स को नियंत्रित करती है। डोज बढ़ाकर लेने से ये नशे के तौर पर उपयोग होने लगी हैं। गंध विहीन होने के कारण नशे के तौर पर इस्तेमाल करने का युवाओं मे चलन बढ़ा है।