फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी चुनाव 2022: मथुरा में भाजपा पर मंडराता भितरघात का खतरा, टिकट बंटेवार से उठे बागी सुर

Tue, 18 Jan 2022 12:59 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

भाजपा में टिकट बंटवारे के बाद मांट और गोवर्धन क्षेत्र में विरोध के सुर उठ रहे हैं। भले ही यह सुर कुछ दिन बाद शांत हो जाएंगे, लेकिन भितरघात का खतरा पार्टी पर मंडराता रहेगा।
 
विज्ञापन
भाजपा। - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मथुरा जिले में भाजपा को इस बार अपनों के भितरघात से जूझना पड़ सकता है। गोवर्धन और मांट विधानसभा क्षेत्र में टिकटों के फेरबदल ने इस स्थिति को और बढ़ा दिया है। हालांकि पार्टी अंदरखाने इस स्थिति को खत्म करने की कोशिश में जुट गई है।

विज्ञापन

2017 के चुनाव में भाजपा ने जनपद की पांच में से चार सीटों पर कब्जा किया था। एक मात्र मांट विधानसभा सीट पर भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन यहां भी पार्टी के खाते में अप्रत्याशित वोट आए थे। 
उम्मीद की जा रही थी 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा फिर पुराने मोहरों पर ही दांव लगा सकती है, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने गोवर्धन के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह का टिकट काटते हुए मांट विधानसभा क्षेत्र में भी उम्मीदवार का चेहरा बदल दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

पिछले चुनाव में एसके शर्मा ने दी थी कड़ी टक्कर
2017 के चुनाव में मांट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार एसके शर्मा को 59 हजार से अधिक मत प्राप्त किए थे। भाजपा के लिए यह प्रदर्शन अब तक का सर्वश्रेष्ठ रहा है। इस बार एसके शर्मा के पक्ष में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मांट में जनसभा को भी संबोधित कर गए थे। ऐसे में टिकट के बदलाव से भितरघात की स्थिति पैदा हो गई है। 

उन्होंने यहां तक कह दिया है कि इस बार पार्टी की जमानत जब्त हो जाएगी। यही स्थिति गोवर्धन क्षेत्र में भी बनी है। यहां भी भाजपा ने मौजूदा विधायक का टिकट काटते हुए नया उम्मीदवार बनाया है। हालांकि विधायक, समर्थकों को समझा रहे हैं कि पार्टी के निर्णय को स्वीकार करें।

दो दिन से चल रहा  हंगामा
एसके शर्मा समर्थक और कारिंदा सिंह के समर्थक पिछले दो दिन से हंगामा कर रहे हैं। एसके शर्मा ने पार्टी के निर्णय के विरोध में खुलेआम एलान कर दिया है। 
राजनीतिक जानकार डॉ. पीके पचौरी का मानना है कि जब इस तरह की घटनाएं हो जाती हैं तो निराशा बढ़ती ही जाती है। भले ही व्यक्ति पार्टी में रहे लेकिन मन व तन से वह पार्टी की सेवा नहीं कर पाता है। ऐसी स्थितियां अक्सर चुनाव में प्रभाव डालती हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें