आगरा के कुबेरपुर स्थित जिस खत्ताघर पर कूड़े के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ होने से दुर्गंध आती थीं, वहां अब फूलों की खूशबू महकेगी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का आदेश आने के बाद नगर निगम ने यहां चार एकड़ क्षेत्र में बाग बनाने का निर्णय लिया है। यहां कुछ हिस्से में घास लगाई जा चुकी है। खुशबू वाले पौधे लगाने के बाद यहां 40 फुट ऊंचा वॉच टॉवर बनाया जाएगा, जिस पर स्टैंड पर दूरबीन रखी होगी। इससे पर्यटक ताजमहल की खूबसूरती को निहार सकेंगे।
आगरा नगर निगम ने कुबेरपुर खत्ताघर पर 47 एकड़ में फैले कूड़े के पहाड़ प्रोसेसिंग के जरिए खत्म कर दिए हैं। यहां 16 एकड़ में मियावाकी तकनीक से जंगल बनेगा। चार एकड़ क्षेत्र में हरियाली विकसित होगी। इसी में फूलों का बगीचा बनेगा। नगरायुक्त अंकित खंडेलवाल ने बताया कि प्रदेश में किसी भी लैंडफिल साइट पर यह पहला प्रयोग है। इसे पूरे देश के लिए मिसाल के तौर पर तैयार किया जा रहा है। जीरो वेस्ट और प्रोसेसिंग के जरिए यहां कचरा नजर नहीं आएगा। यह पर्यटकों के लिए आकर्षण स्थल बनेगा। कुबेरपुर लैंडफिल साइट के सामने ताजमहल है, जिसे वॉच टावर पर दूरबीन के जरिए देख सकेंगे। 20 एकड़ में जंगल और बाग बनाने के बाद बाकी 27 एकड़ में भूमि पर कचरा से बिजली बनाने का प्लांट लगाया गया है।
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प्लास्टिक पाइप और जूते के सोल हो रहे तैयार
प्लास्टिक वेस्ट से पाइप बनाने और जूते के सोल बनाए जा रहे हैं। भवन निर्माण के मलबे से इंटरलॉकिंग टाइल्स बनाई जा रहीं हैं। 500 टन प्रतिदिन की क्षमता वाले प्लांट से गीले कचरे से खाद बनाई जा रही है। नेशनल ग्रीन टिब्यूनल के आदेश के बाद कुबेरपुर खत्ताघर के दिन बदलने वाले हैं। कुबेरपुर खत्ताघर पर ही शहरभर से निकलने वाला कचरा एकत्र किया जाता था। जिस वजह से यहां कूड़े के पहाड़ लग गए थे। जिन्हें नगर निगम ने खत्म कर दिया है। अब इस जगह को नए रंग रूप में संवारने का खाका निगम ने खींचा है। दिसंबर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगने के बाद बिजली उत्पादन किया जा सकेगा।
हर दिन कचरे का पूरा निस्तारण
नगर आयुक्त ने बताया कि प्लास्टिक कचरे से निगम पाइप बना रहा है। सीएंडडी वेस्ट प्लांट की क्षमता 300 टीपीडी से बढ़ाकर अब 1500 (3x500 मीट्रिक टन) की कर दी गई है। फरवरी 2025 के बाद से साइट पर कोई भी नया कचरा बिना प्रोसेसिंग के नहीं रखा जा रहा है। प्लास्टिक कचरे से पाइप और जूते के सांचे बनाकर रि-साइकिलिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।