आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कार।
- फोटो : आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर भाऊपुरा गांव पास दुर्घटना में क्षतिग्रस्त कार।
आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर नींद की झपकी और तेज गति (ओवरस्पीड) हादसों की बड़ी वजह है। इसमें युवाओं की मौत ज्यादा हो रही हैं। सुप्रीम कोर्ट रोड सुरक्षा समिति की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी जैन ने इनके बचाव के लिए ठोस उपाय की जरूरत बताई है। हादसों का विवरण सालाना अपलोड नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन बताया कि आगरा लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बीते साल जनवरी से दिसंबर तक 1391 हादसे हुए हैं। खास बात हादसों की बड़ी वजह नींद की झपकी आना और ओवरस्पीड बताई गई है। 811 हादसे नींद की झपकी और 103 ओवरस्पीड के कारण हुए। जानवरों के टकराने से 34, टायर फटने से 90 और 356 हादसे की विभिन्न वजहें रहीं।
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इन हादसों में 190 लोगों की जान चली गई। अधिकांश युवा रहे। 1663 घायल हुए और 122 गंभीर रूप से घायल हुए, जिनमें मल्टीपल फ्रैक्चर, सिर की चोटें तक लगीं। इसके बावजूद बचाव के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। नींद की झपकी, ओवरस्पीड के लिए संकेतक समेत अन्य प्रभावी योजना नहीं बनाई हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ लोगों की जान भी जा रही हैं। बैठक में सालाना डाटा अपलोड करने की भी मांग की है, जिससे इनके प्रयासों का आकलन किया जा सके।
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कार से हो रहे हैं सबसे ज्यादा हादसे
एक्सप्रेस-वे पर कार से सबसे ज्यादा 732 हादसे हुए। इनमें वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए। 392 हादसे ट्रक समेत भारी वाहन, 110 हादसे बस से और 145 हादसे बाइक से हुए हैं। गलत ढंग से हाईवे को पार करने और पैदल चलने वाले भी हादसे के शिकार हुए। ऐसे 12 लोग रहे।