फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में आरोपी नेशनल शूटरों की अग्रिम जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया, जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
आगरा के थाना नाई की मंडी के धोखाधड़ी और फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में आरोपी राष्ट्रीय शूटर अरशद खान और मोहम्मद जैद खान को अग्रिम जमानत नहीं मिली। उनके अग्रिम जमानत के प्रार्थना पत्र को जिला जज संजय कुमार मलिक ने खारिज कर दिया।
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निरीक्षक एसटीएफ यतींद्र शर्मा ने थाना नाई की मंडी में आरोपी अरशद खान और मोहम्मद जैद खान व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, आयुध अधिनियम व अन्य आरोपों में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। फर्जी दस्तावेज से शस्त्र लाइसेंस बनवाने का आरोप लगाया था। आरोपी अरशद खान ने अग्रिम जमानत प्रार्थना पत्र में कहा कि वह शूटिंग का नेशनल चैंपियन है। उसे सात लाइसेंस रखने का अधिकार है। वर्तमान में दो लाइसेंस वारिसान प्रक्रिया के तहत हैं। अन्य लाइसेंस शूटिंग खिलाड़ी की वजह से लिए हैं। वह भी जांच के बाद ही मिले।
आरोपी जैद खान का शस्त्र लाइसेंस जिलाधिकारी ने निर्गत किया है। वह वर्ष 2022 में आगरा से गुरुग्राम में व्यापार करने के कारण रहने लगा था। उसने वहीं का आधार कार्ड और शस्त्र लाइसेंस आदि गुरुग्राम के पते पर बनवा लिए। लाइसेंस स्वीकृति के दौरान वह बालिग था। हाईकोर्ट से उसकी गिरफ्तारी पर रोक थी। वह भी शूटिंग का नेशनल चैंपियन है। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की जमानत खारिज कर दी।
यह भी थे नामजद
एसटीएफ के निरीक्षक यतींद्र शर्मा ने प्राथमिकी में अरशद खान, मोहम्मद जैद खान के अलावा राजेश कुमार बघेल, भूपेंद्र सारस्वत, शोभित चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त असलहा बाबू संजय कपूर को नामजद किया था। सभी पर अलग-अलग आरोप हैं।
जन्मतिथि छिपाकर लाइसेंस लेने का आरोप
अभियोजन ने जमानत का विरोध किया। तर्क दिया कि आरोपियों ने वास्तविक जन्मतिथि छिपाकर कूटरचित प्रपत्रों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त किए। अपराध गंभीर प्रकृति का है। जमानत अर्जी निरस्त करने की मांग की गई। सुनवाई में कहा कि शस्त्र विक्रय के बाद विभाग को सूचना नहीं दी गई कि शस्त्र किसे बेचे गए। आरोप है कि राष्ट्रीय शूटर की आड़ में शस्त्रों का अवैध विक्रय किया गया। अग्रिम जमानत अर्जी खारिज होने के बाद आरोपियों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।