आगरा। कोरोना महामारी के दौर में शॉपिंग हो या फिर पढ़ाई सब आनलाइन हो रही है। इसके लिए लोग स्मार्टफोन और लैपटॉप का प्रयोग कर रहे हैं। इससे इंटरनेट का प्रयोग बढ़ गया है। जहां आम लोग इसका फायदा उठा रहे हैं, वहीं साइबर अपराधियों ने भी अपना जाल फैला दिया है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग, नेट बैंकिंग आदि के माध्यम से खाते खाली कर रहे हैं। जरा सी असावधानी नुकसान दे सकती है। इसलिए सतर्कता जरूरी है।
अधिवक्ता को बनाया सेक्सटार्शन का शिकार
दीवानी के एक अधिवक्ता को डॉट कॉम से साइबर अपराधियों ने सेक्सटार्शन का शिकार बनाया। कॉल करके न्यूड वीडियो रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल किया गया।
सोने की ट्रेडिंग के बहाने लूटा
हरीपर्वत क्षेत्र के व्यापारी के व्हाट्स एप पर एमसीएक्स में सोने की ट्रेडिंग का कारोबार करने का मैसेज किया गया। खाता खुलवाकर 36 लाख रुपये जमा कराकर निकाल लिए।
पेंशन के नाम पर 15 लाख रुपये किए पार
पुलिस विभाग के फालोवर के पास पेंशन के भुगतान के लिए कोषागार के अधिकारी बनकर कॉल किया गया। उनसे खाते की जानकारी ले नेट बैंकिंग चालू करके 15 लाख रुपये निकाले।
ऑनलाइन गेम के दौरान 36 लाख उड़ाए
हरीपर्वत क्षेत्र के व्यापारी के बेटे ने आनलाइन गेम के दौरान खाते की जानकारी दे दी। इसके बाद व्यापारी के 36 लाख रुपये निकल गए।
केवाईसी अपडेट के बहाने रकम निकाली
संजय प्लेस की एक केक बेचने वाली कंपनी के मैनेजर के पास खाते की केवाईसी अपडेट के नाम पर लिंक भेजा गया। लिंक पर क्लिक करते ही खाता नंबर, एटीएम कार्ड का नंबर, पिन आदि ले लिया। खाते से 30 हजार निकल गए।
ये हैं धोखाधड़ी के तरीके
- आनलाइन गेमिंग : बच्चे आनलाइन गेम के दौरान प्वाइंट और स्टेज बढ़ाने के लिए डेबिट कार्ड की जानकारी भर देते हैं, जिससे खाते से रकम निकल जाती है।
- लिंक : मोबाइल पर रिचार्ज पर डिस्काउंट, केवाईसी अपडेट कराने, ऑफर के नाम पर लिंक भेजा जाता है। लिंक पर क्लिक करते ही एक पेज खुलता है। इसमें खाते की जानकारी भरने पर डाटा चोरी हो जाता है।
- सोशल मीडिया : फेसबुक, ट्वीटर, इंस्टाग्राम आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर साइबर अपराधियों ने युवतियों के नाम से फर्जी आईडी बना रखी हैं। वह फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजकर झांसे में लेकर धोखाधड़ी करते हैं।
ये सावधानी जरूरी
- अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट और वीडियो कॉल स्वीकार न करें।
- लुभावने आफर वाले लिंक पर क्लिक न करेें।
- नेट बैंकिंग इस्तेमाल करते समय पब्लिक वाईफाई का इस्तेमाल न करें।
- अपने सभी पासवर्ड मजबूत बनाएं, जिसमें स्मॉल और कैपिटल लेटर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर का इस्तेमाल करते हुए कम से कम आठ अंकों हों।
- एक अच्छे एंटी वायरस का इस्तेमाल करें।
- अपने वेब ब्राउजर, एप और अन्य सॉफ्टवेयर को हमेशा अपडेट रखें।
- अपने सभी एकाउंट्स, ईमेल व बैंकिंग एकाउंट्स में 2एफए एक्टिवेट रखें।
- अपने डेटा का समय-समय पर बैंक से अपडेट लेते रहें।
- अपने ईमेल या मोबाइल फोन पर टेक्स्ट मैसेज के रूप में आए हुए ओटीपी को किसी के साथ साझा न करें।
(एडीजी आगरा जोन राजीव कृष्ण के मुताबिक)
एडीजी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किया है। साइबर अपराध होने पर इस पर तुरंत कॉल करना चाहिए। इसमें ये जानकारी देना जरूरी है।
- शिकायतकर्ता को फोन कर अपना मोबाइल नंबर, अपराधी का ट्रांजेक्शन नंबर, धनराशि और तिथि बतानी होगी।
- सूचना देने के बाद शिकायतकर्ता को एसएमएस के माध्यम से एक लॉगिन आईडी/रेफरेंस नंबर प्राप्त होगा, जिसका उपयोग कर 24 घंटे के भीतर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना अनिवार्य है।
- इस सुविधा के उपयोग से वित्तीय साइबर धोखाधड़ी के शिकार व्यक्ति की धनराशि वापस कराने में मदद मिलेगी।
पिछले दो साल में साइबर अपराधी लोगों के खाते से करोड़ों रुपये निकाल चुके हैं। आगरा जोन में वर्ष 2020 में 8326 शिकायत दर्ज की गईं। इनमें दो हजार मामले आगरा के थे। वर्ष 2021 में यह आंकड़ा बढ़कर 11200 तक पहुंच गया। आगरा के 2500 मामले दर्ज हुए। इनमें ऑनलाइन शॉपिंग, ब्लैकमेलिंग, धोखाधड़ी, बैंक खाते की जानकारी लेकर, नौकरी, रिवार्ड प्वाइंट, बीमा लाभ, टेंडर दिलाने, व्यापार का झांसा देने के मामले रहे।