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UP: मां के सामने पीटा, करंट लगाया, पुलिस बर्बरता की खौफनाक कहानी; न्याय मांगने में चली गई थी जान

Fri, 20 Mar 2026 08:20 AM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

पुलिस हिरासत में राजू गुप्ता की मौत के बाद उनकी मां रेनूलता ने न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी, लेकिन फैसला आने से पहले ही कोरोना काल में उनका निधन हो गया। मामले में पुलिस पर थर्ड डिग्री देने और प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई टालने के आरोप लगे थे।
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राजू हत्याकांड - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के सिकंदरा थाने की पुलिस के हिरासत में राजू गुप्ता की माैत ने वृद्ध मां रेनूलता को तोड़ दिया। फिर भी न्याय पाने के लिए वह खूब लड़ीं। अधिकारियों के सामने बयान में खुद देखी गई प्रताड़ना को बयां किया। बेटे की माैत के गम ने कोरोना काल में उनकी जान चली गई। अदालत का फैसला तब आया है, जब वह दुनिया में नहीं हैं।
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राजू के मथुरा में रहने वाले चाचा अशोक कुमार को फैसले की जानकारी नहीं थी। अमर उजाला रिपोर्टर ने उन्हें बताया। उन्होंने कहा कि वह अपने अधिवक्ता से इसकी जानकारी लेंगे। घटना के मुताबिक, जिस समय राजू गुप्ता को पुलिस ने घर से उठाया था, उस समय रेनूलता भी माैजूद थीं। वह थाने भी गई थीं।

उन्होंने पुलिस अधिकारियों को बयान दिए थे। कहा था कि पड़ोसी एसपी सिंह घटना से दो दिन पहले हरिद्वार जा रहे थे। उनकी पत्नी घर का सामान रख रही थीं। बेटा राजू भी पड़ोस के घर में टीवी देख रहा था। बाद में पड़ोसी लाैटकर आए। राजू को फोन कर अपने पास बुलाया। उस पर सोने के जेवर से भरा बैग चोरी करने का आरोप लगाया। उसने इन्कार किया तो पुलिस से शिकायत कर दी। बिना एफआईआर के पुलिस उसे पकड़ ले गई थी।

 

मां ने अधिकारियों से कहा कि उनके बेटे को डंडे से पीटा गया। उसे थर्ड डिग्री देते हुए करंट भी लगाया गया। जब वो मर गया तो उन्हें घर भेज दिया गया। पड़ोसी अंशुल और विवेक ने भी पिटाई की थी। कई पुलिसकर्मी माैजूद थे। मगर प्राथमिकी में किसी पुलिसकर्मी का नाम शामिल नहीं किया गया।


 

घटना के बाद कई दिन तक वैश्य संगठन ने प्रदर्शन किया था। पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पूरे थाने को जिम्मेदार ठहराया था। मगर कार्रवाई इंस्पेक्टर और दो दरोगा पर हुई थी। उन्हें निलंबित किया गया था। इकलाैते बेटे की माैत से मां रेनू टूट गई थीं। लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस तो दर्ज करा दिया। मगर पुलिस जांच-जांच खेलती रही। पहले वो सिकंदरा क्षेत्र में रहती थीं। बाद में जगदीशपुरा क्षेत्र में रहने लगीं। उन्हें पीछे हटने के लिए लालच दिया गया था। मगर वह अपने बेटे को न्याय दिलाना चाहती थीं। इससे पहले ही कोरोना काल में उनकी सांसें थम गई थीं।

अमर उजाला बना था आवाज
राजू गुप्ता की पुलिस हिरासत में माैत के मामले में अमर उजाला पीड़ित मां की आवाज बना था। एक महीने से अधिक समय तक खबरें प्रकाशित की गई थीं। इससे पुलिस कार्रवाई में तेजी आई थी। आरोपी अंशुल प्रताप विधायक का रिश्तेदार था। इस वजह से पुलिस भी कार्रवाई नहीं कर रही थी। वह उनके घर में ही छिप गया था। बाद में दरोगा सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

 

विधायक के प्रभाव में थी पुलिस
पुलिस हिरासत में राजू की माैत के बाद भी कार्रवाई में ढिलाई बरती गई थी। अंशुल प्रताप के एक रिश्तेदार मथुरा में विधायक थे। परिजन ने आरोप लगाया था कि वही अंशुल को बचा रहे थे। पुलिस अधिकारी भी उनके प्रभाव में थे।
 

पुलिस की थर्ड डिग्री के कई मामले
कमिश्नरेट में पुलिस की थर्ड डिग्री का यह कोई अकेला मामला नहीं है। इससे पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं। थाना जगदीशपुरा में चोरी के शक में सफाईकर्मी को पीटा गया था। उसकी मृत्यु हो गई थी। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। तब डीजीपी राजीव कृष्ण आगरा में एडीजी थे। उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई कराई थी।

 
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हाल में थाना किरावली और छत्ता के मामले भी चर्चा में हैं। थाना किरावली में हत्या के शक में उठाए गए किसान को पीटा गया था। उसके दोनों पैरों की हड्डियां तोड़ दी गईं। बाद में एसओ ने मामले को दबाने का प्रयास किया। मामला अधिकारियों के पास पहुंचने पर कार्रवाई हुई थी। थाना छत्ता की जीवनी मंडी चाैकी में एक दूध विक्रेता को पीटा गया था। इस मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मगर कार्रवाई नहीं हुई।
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