बरसात का मौसम अपने साथ बीमारियां लेकर आता है। दूषित पानी, सड़ी-गली सब्जियों का सेवन सेहत पर भारी पड़ सकता है। इन दिनों ज्यादा संख्या में बच्चे पीलिया से पीड़ित हो रहे हैं। समय पर उपचार नहीं मिलने पर यह जानलेवा भी हो सकता है। पीलिया की सबसे बड़ी वजह दूषित पानी या भोजन का सेवन है। कई बार लोग चिकित्सकीय उपचार छोड़ झाड़-फूंक में भी पड़ जाते हैं। हालांकि इससे जान भी जा सकती है। लिहाजा, पीलिया के लक्षणों का पता चलते ही तुरंत चिकित्सक से अपना उपचार करवाएं।
लक्षण
- त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला हो जाना सबसे बड़ा लक्षण है।
- उल्टी करने का दिल करना या जी मचलाना।
- पेशाब का रंग पीला होना और शौच का रंग सफेद होना।
- भूख नहीं लगना, थकावट महसूस करना।
इन बातों का रखें ध्यान
- फिल्टर, आरओ या फिर उबालकर ठंडा किए हुए पानी का ही सेवन करें।
- बासी भोजन, कटे और खुले फल और सब्जियां खाने से परहेज करें।
- बाहरी खाते-पीते समय ध्यान रखें कि वहां साफ-सफाई की उचित व्यवस्था हो।
- अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा रखें।
- यदि किसी क्षेत्र में पीलिया फैल जाए तो वहां सभी को पानी उबालकर ही पिलाएं।
- झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़कर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें।
- पीलिया के मरीज को पूरी तरह से आराम करना चाहिए।
मरीजों में बच्चे ज्यादा
एसएनएमसी के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज यादव ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में पीलिया से पीड़ित बच्चों की संख्या तुलनात्मक रूप से बढ़ी है। यह मुंह के माध्यम से फैलता है, लिहाजा खाने-पीने की वस्तुओं में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। मक्खी जिस भोजन पर बैठे उसे कतई ग्रहण न करें।
पीलिया से बचें, करें परहेज
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेएन टंडन ने बताया कि पिछले कुछ समय से पीलिया पीड़ित बच्चों की संख्या में बहुत इजाफा हुआ है। निजी चिकित्सकों के यहां लाइन लगाकर पीलिया के मरीज आ रहे हैं। तमाम बच्चे अस्पतालों में भर्ती भी हैं। पीलिया से बचने के लिए दूषित भोजन और पानी से परहेज रखें।