भुगतान न होने पर ठेकेदारों ने रोका काम
साल 2009 में शहरी गरीबों के लिए बीएसयूपी योजना लांच की गई। 5 हजार आवास बनाने की जिम्मेदारी एडीए को दी गई। डूडा की इस योजना में 4 अनुबंध के तहत नरायच में निर्माण कार्य कराए गए। 2014 में प्रदेश सरकार ने बजट रोक दिया तो ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया।
भुगतान न होने पर काम करने वाली एजेंसियां और ठेकेदार इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दाखिल करने के साथ आर्बिट्रेशन में चले गए। तब से अब तक मामला लंबित है। शास्त्रीपुरम में 1360 मकानों के लिए डूडा ने 56 करोड़ रुपये जारी किए, जिनमें ब्लॉक 3 के चारों पॉकेट का निर्माण शुरू किया गया है, लेकिन पुराने बने मकान पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गए हैं और छतें गिरासू तथा पूरे मानसून नल की तरह से पानी बरसाती रहीं।
निर्माण संबंधी शिकायतें मिलीं
एडीए के सचिव राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि शास्त्रीपुरम में जो शिकायतें आई थीं, उन्हें दूर कराया गया था, लेकिन यहां निर्माण संबंधी शिकायतें हैं। सीवर और पानी की भी शिकायतें मिली हैं। ठेकेदार से कमियों को दूर कराएंगे। नरायच में आईआईटी रुड़की से स्ट्रक्चरल जांच के लिए कहा गया है। उन्होंने अभी जांच शुरू नहीं की है।