वसंत पंचमी के पर्व पर जौ व गेहूं की बालियां, टेशू के फूल मां शारदा को अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया कि वसंत पंचमी आनन्दोत्सव है, इसके अधिष्ठाता प्रजापालक विष्णु और श्रीकृष्ण है। इसीलिए भगवान कृष्ण की लीलाभूमि ब्रज में वसंतोत्सव की प्रधानता है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस वर्ष मंगलवार के साथ अश्विनी नक्षत्र का संयोग अमृतसिद्धि महायोग व सिद्धि योग भी बन रहा है, जो विद्यार्थियों के लिए खास है। भौमाश्विनी योग का संयोग दुर्लभ है, जो रात्रि 10.55 बजे से दूसरे दिन सूर्योदय तक रहेगा। जो विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग ले रहे हैं, उन्हें इस योग में मां की साधना से सरस्वती की कृपा प्राप्त होगी।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सृष्टि काल में आदि शक्ति ने अपने को पांच भागों में बांट लिया। वे राधा, पद्मा, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के रूप श्रीकृष्ण के विभिन्न अंगों से प्रकट हुई थीं। उस समय श्रीकृष्ण के कंठ से उत्पन्न देवी का नाम सरस्वती हुआ। यही कारण है कि सत्व गुण सम्पन्ना देवी सरस्वती का एक नाम वाणी भी है। इसीलिए मां सरस्वती का अधिकार वाणी पर माना जाता है, यह वहीं विराजमान होती हैं।