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तीन दिन बंद रहेंगे बैंक:  इन 450 शाखाओं में नहीं होगा कोई भी काम, यूपीआई और नेट बैंकिंग वालों को राहत

Fri, 11 Sep 2026 08:22 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

सरकारी बैंकों की 450 शाखाओं में हड़ताल रहेगी, इसके बाद शनिवार और रविवार की छुट्टी से बैंक तीन दिन बंद रहेंगे। 25 लाख से अधिक खाताधारकों का करीब 500 करोड़ रुपये का नकद लेनदेन प्रभावित होने की आशंका है, जबकि निजी बैंक और डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी।
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बैंक रहेंगे बंद - फोटो : AI
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विस्तार
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 अगर आपको सरकारी बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम है, तो आपको सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा। पांच दिवसीय बैंकिंग समेत अन्य मांगों को लेकर शुक्रवार को जिले के 12 सरकारी बैंकों की 450 शाखाओं में हड़ताल रहेगी।
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इसके बाद महीने का दूसरा शनिवार और रविवार होने के कारण बैंक अब सीधे सोमवार, 14 सितंबर को खुलेंगे। लगातार तीन दिन सरकारी बैंकों में ताले लटकने से जिले के 25 लाख से अधिक खाताधारकों का करीब 500 करोड़ रुपये का नकद लेनदेन प्रभावित होगा।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के संयोजक गजेंद्र सिंह ने बताया कि संजय प्लेस स्थित एसबीआई प्रशासनिक कार्यालय के शुक्रवार को धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अंकित सहगल ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल होगी और फिर भी बात नहीं बनी तो 26 अक्तूबर से अनिश्चितकालीन तालाबंदी की जाएगी।
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बता दें कि जिले में कुल 31 बैंकों की 560 से अधिक शाखाएं हैं, जिनमें लगभग 38 लाख खाताधारक हैं। बैंक काउंटर बंद रहने से व्यापारियों और बड़ी रकम का लेनदेन करने वालों को खासी परेशानी होगी।

चेक क्लीयरेंस और ड्राफ्ट बनवाने जैसे काम भी सोमवार तक अटक जाएंगे हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि इस दौरान निजी बैंक खुले रहेंगे। साथ ही नेट बैंकिंग, यूपीआई और एटीएम सेवाएं पूरी तरह सुचारू रहेंगी, जिससे रोजमर्रा की खरीदारी में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
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ये हैं बैंक कर्मचारियों की मांगें
इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) की सहमति के बावजूद वित्त मंत्रालय में लंबित पांच दिवसीय बैंकिंग को तत्काल लागू करना।

बैंकों में क्लर्क और सब-स्टाफ के पदों पर पर्याप्त भर्ती करना।
नई पेंशन स्कीम (एनपीएस) को खत्म कर पुरानी पेंशन (ओपीएस) बहाल करना।

पेंशन अपडेशन और नई मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम बैंकों द्वारा भरा जाना।
 
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