रुनकता स्थित नट बस्ती में बातचीत करती महिलाएं।
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लोगों ने सोचा कि अब वापस नहीं आएंगे, लेकिन अगले दिन सुबह को वे फिर नजर आए। तब पता चला कि वे सुबह को जाते हैं, शाम को लौट आते हैं। अगर पुलिस रात में आए तो वे वहीं मिलेंगे। बस्ती की महिलाएं पुलिस के आते ही कहने लगती हैं कि बांग्लादेशी यहां से जा चुके हैं। वे अपना सामान क्यों नहीं ले गए? इस पर कहती हैं कि शायद बाद में ले जाएंगे।
आधार कार्ड बन गए, बिजली कनेक्शन भी हैं
अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार करना भी आसान नहीं है। पुलिस को पहले उनके खिलाफ साक्ष्य जुटाने होंगे। इसके लिए पड़ताल करनी होगी। कारण यह है कि इन लोगों ने वोटर कार्ड, आधार कार्ड सब बनवा लिए हैं। इनके पास बिजली का कनेक्शन भी है। यह गिरफ्तार किए गए बांग्लादेशी गाजी के नाम से हैं।
रुनकता स्थित नट बस्ती।
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बांग्लादेश के नागरिक गाजी ने नट बस्ती के पड़ोस में रहने वाले दुकानदार सुरेंद्र से प्लाट किराये पर ले रखा है। वह आठ हजार रुपये महीने किराया दे रहा था। बस्ती में रहने वाले लोगों को जगह उसने किराये पर दे रखी थी, उन्हें ब्याज पर पैसा भी देता था। सभी को कबाड़ के काम में लगा रखा था। गाजी की ठीकठाक कमाई थी, उसने एक प्लाट खरीदा था, जो पास में ही है, उसने दो गाड़ियां भी खरीदी थीं।