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UP: यमुना एक्सप्रेस-वे पर पैदल चलने पर है रोक, फिर भी 39 राहगीर गवां चुके हैं जान...ये है नियम

Mon, 22 Jul 2024 11:16 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, आगरा

सार

यमुना एक्सप्रेस-वे पर जिस रफ्तार के साथ वाहन दौड़ते है, उसे लेकर यहां पर पैदल चलने पर रोक है। इसके बाद भी यहां 39 राहगीर अपनी जान गवां चुके हैं। 
 
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यमुना एक्सप्रेस वे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यमुना एक्सप्रेस-वे पर पैदल चलने या इसे पार करने पर सख्ती से रोक है। इसके बावजूद 12 साल में 103 हादसे राहगीरों के साथ हुए। इन हादसों में 39 लोगों की मौत हुई और 41 घायल हुए। पिछले साल 16 राहगीरों की मौत और 22 घायल हुए। यह खुलासा यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येडा) के वरिष्ठ अधिवक्ता व रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट केसी जैन को मिली सूचना से हुआ है।
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रात में ज्यादा हादसे
वर्ष 2023 में पैदल चलने वाले 19 में से 16 मृतकों की मौत रात 8 बजे से सुबह 6 के बीच हुई। रात में तेज रफ्तार में वाहन चालकों ने राहगीरों को कुचला और पीछे मुड़कर नहीं देखा। 16 मृतकों में से 14 की मृत्यु अज्ञात वाहनों से हुई।



 
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पुलिस और पेट्रोलिंग टीम पर सवाल
अधिवक्ता केसी जैन का कहना है कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर पैदल चलने पर रोक के बावजूद 39 लोगों की मौत से पुलिस और पेट्रोलिंग टीम की सक्रियता व व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। सीसीटीवी कैमरे और पेट्रोलिंग टीम से निगरानी क्यों नहीं हो सकी? जगह-जगह बसों के लिए लोगों का अनधिकृत रूप से एकत्रित होना भी सवाल उठाता है।

 

बन गए अवैध बस स्टॉप
सूचना में यह भी उल्लेख है कि यमुना एक्सप्रेस-वे पर कुछ स्थानों पर अनधिकृत बस स्टॉप बन गए हैं। यहां बसें व अन्य पैसेंजर वाहन रुकते हैं और यात्रियों को उतारते-बैठाते हैं। सूचना में यह भी कहा गया कि पेट्रोलिंग वाहन ऐसे वाहनों को हटा देते हैं और यदि वह नहीं मानते हैं तो पुलिस को सूचना दी जाती है। इस तरह येडा की ओर से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा दिया गया है।

 

एक्सप्रेस-वे पर तीन फीसदी मौतें
यदि यमुना एक्सप्रेस-वे पर सड़क हादसों की संख्या की बात करें, तो वर्ष 2012 से वर्ष 2023 तक 7,625 हादसे हुए। जिनमें 1,320 लोगों की मौत हुई, घायलों की संख्या 11,168 थी। इनमें पैदल चलने वाले मृतकों की संख्या 39 थी जो कुल हादसों का 3 प्रतिशत थी।
 
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संयुक्त कार्ययोजना बने
अधिवक्ता जैन का कहना है कि येडा एवं पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से योजना बनाकर पैदल चलने वालों को हादसों से बचाने के लिए कार्ययोजना बनानी चाहिए।
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