फर्राटा भर रहे ऑटो मोबाइल कंपनियों की बिक्री पर मंदी के शोर ने दो महीने पहले ब्रेक लगाया। लेकिन मंदी का हल्ला जितना मचा, उतना असर बिक्री पर नहीं पड़ा। बीएस-4 इंजन और प्रस्तावित बीएस-6 इंजन पर नीतियों को लेकर असमंजस गहराया और इसी बीच इलेक्ट्रिक कारों की घोषणा ने बाजार की रफ्तार जरूर थोड़ी थामी। लेकिन अब वित्त मंत्री की ओर से रियायतों का पिटारा खोलने और असमंजस दूर करने से बाजार टॉप गियर में आने को तैयार है। वाहनों की बुकिंग बताती है कि ऑटो मोबाइल्स सेक्टर नवरात्र और दिवाली से चमकेगा।
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डा. सीमा सिंह व रंजना बंसल
- फोटो : अमर उजाला
डा. रंजना बंसल, एमडी, अशोक ऑटो सेल्स का कहना है कि ऑटो सेक्टर में यह मंदी नहीं, बल्कि मौका है, जिसका फायदा ग्राहकों को उठाना चाहिए। ऑटो मोबाइल निर्माता अपने बीएस-4 वाहनों को बेचने के लिए नवरात्र और दिवाली के लिए जैसे ऑफर दे रहे हैं, ऐसे कभी नहीं मिले। दोपहिया, चार पहिया, लाइट कॉमर्शियल वाहन खरीदने वालों के लिए यह सबसे अच्छा समय है, जब वह कम कीमत में वाहन खरीद सकते हैं। दरअसल, इस सेक्टर में बीएस-4 की जगह बीएस-6 श्रेणी के वाहन लाने के लिए सरकार ने बेहद कम समय निर्माताओं को दिया। इस बीच ही इलेक्ट्रिक वाहनों की घोषणा
हो गई। इससे यह असमंजस बढ़ गया कि बीएस-4 वाहन चलेंगे या नहीं। वित्त मंत्री की घोषणा के बाद असमंजस दूर हुआ है। वाहनों की स्क्रैप पॉलिसी आने के बाद ऑटो सेक्टर उड़ान भरने को तैयार रहे।
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automobile sector
- फोटो : Social
डा. सीमा सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, सेठ पदमचंद जैन इंस्टीट्यूट का कहना है कि नोटबंदी के बाद जीएसटी और फिर ऑटो सेक्टर में एक के बाद एक कई नीतियों में बदलाव से न केवल निर्माता, बल्कि डीलर और ग्राहक भी असमंजस में हैं कि आगे क्या होगा। रही-सही कसर इलेक्ट्रिक वाहनों के इंतजार ने पूरी कर दी। डीजल-पेट्रोल के वाहनों पर निवेश क्यों किया जाए। यह कब तक चलेंगे, इस सवाल से असमंजस में पड़े ग्राहक इंतजार कर रहे हैं। बीएस-4 से सीधे बीएस-6 स्टैंडर्ड के बदलाव से निर्माता, वेंडर, ग्राहक, डीलर तैयार नहीं थे। महज तीन साल का समय निर्माताओं को दिया गया जो इतने बड़े बदलाव के लिए बेहद कम है। इस असमंजस का असर देखने के बाद सरकार ने जो नीतियां अपनाई हैं, उनके परिणाम दो महीने में दिखने लगेंगे।
पॉलिसी बदलते ही अब इस सेक्टर की मंदी दूर होने वाली है।
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संवाद कार्यक्रम में मौजूद व्यापारी
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मौजूदा समय ग्राहकों के लिए सबसे अच्छा है। बीएस-4 या बीएस-6, ये ग्राहकों की चिंता का विषय नहीं हैं। यह सभी वाहन अपने रजिस्ट्रेशन के पूरे समय चलेंगे। ऐसे छूट और फाइनेंस कराने के ऑफर फिर शायद ही मिल पाएं। नवरात्र और दिवाली के लिए ग्राहक शोरूम तक आने लगे हैं। -रमेश चंद अग्रवाल, आत्माराम हीरो, दो पहिया वाहनों के लिए आने वाला समय अच्छा है। जब तक पॉलिसी साफ नहीं थीं, तब तक भ्रम में थे, लेकिन अब माहौल बदला है। नई ऊर्जा, नई सोच के साथ बाजार फिर से तैयार है। -नवनीत बंसल, प्रकाश मोटर्स ऑटो मोबाइल सेक्टर में मंदी नहीं थी, बल्कि इसका शोर ज्यादा था। ग्राहक केवल रुके हुए थे और नई नीतियों के स्पष्ट होने, नए मॉडल आने के इंतजार में थे। फेस्टिवल सीजन में फिर तैयारी है। -दिवेश गोयल, कल्याण हुंडई, बाजार में मंदी साइक्लॉजिकल ही थी। बीते साल के मुकाबले बिक्री के आंकड़ों में ज्यादा अंतर नहीं है। बिक्री में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन इसे मंदी का नाम देना गलत है। -संजय नौहवार, एनआरएल हुंडई
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अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में मौजूद व्यापारी
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बाजार में नकारात्मकता दूर करने की जरूरत है। ग्राहकों को बीएस-4, बीएस-6 के भ्रम को दूर करें और बीएस-4 के फायदे गिनाएं। कीमतों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह बताना होगा। ऑटो सेक्टर फिर से रफ्तार पकड़ने लगेगा।-कुलदीप सिंह, कल्याण महिंद्रा, सबसे ज्यादा रोजगार और जीएसटी देने वाला यही उद्योग है। शोर ज्यादा मचाया गया, जबकि वास्तविकता यह नहीं थी। दो महीने थोड़ी बिक्री गिरी, लेकिन वित्त मंत्री की घोषणाओं के बाद नया सीजन बेहतर होगा। -अंशुल अग्रवाल, आत्माराम महिंद्रा, बीएस-6 और इलेक्ट्रिक कारों का मुद्दा एक साथ आ जाने से असमंजस की स्थिति आ गई। अब ऑटोमोबाइल्स स्लो डाउन से आगे बढ़ रहा है। उम्मीदें कायम हैं कि अच्छा वक्त आएगा।-स्वाधीन बरीक, कियो मोटर्स, रजिस्ट्रेशन शुल्क सात से बढ़कर दस फीसदी हो गया। पांच साल का इंश्योरेंस कर दिया गया, यह फायदेमंद है, लेकिन ग्राहक इन सब पर सोचता है। रुकता भी है। जब सभी मंदी कहने लगते हैं तो ग्राहक भी इंतजार की मुद्रा में आ जाते हैं। -सतीश त्रिखा, पीपुल्स होंडा
Automobile sector sales drop in july 2019
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पहले जैसी बिक्री तो नहीं, पर ठीक स्थिति रही है। कारपोरेट टैक्स में कमी का असर दिखाई दे रहा है। कंपनियों ने भारी डिस्काउंट का एलान किया है। ऐसे ऑफरों से बिक्री रफ्तार पकड़ेगी। -नवीन नारंग, केटीएल मारुति, पहली बार वाहन खरीदने वालों की संख्या बरकरार है, लेकिन जो बार-बार वाहन बदलते हैं, वह इलेक्ट्रिक वाहनों और बीएस-6 स्टैंडर्ड के कारण रुक गए। उन्हीं के कारण कुछ असर आया। -राम मोहन कपूर, मनोरम बजाज, डीजल, पेट्रोल के वाहन कब तक सड़कों पर रहेंगे, यह भ्रम बना हुआ है। रजिस्ट्रेशन करा लें तो मियाद कितनी होगी। यह दूर होेने के साथ ही ग्राहकों की संख्या बढ़ती जाएगी। -अरविंद कुमार सिंह, अभय ऑटो, मंदी का हल्ला इस कदर मचाया गया कि लोग वाहन खरीदने के लिए इंतजार करने लगे। नकारात्मकता इस बीच बाजार पर हावी हो गई, जिसे सभी डीलर, कंपनियां, वेंडर मिलकर दूर करें। -आनंद सागर पांडे, अरविंद हुंडई, कारपोरेट टैक्स में कमी के बाद मारुति ने छूट की घोषणाएं की हैं। इससे सकारात्मक संदेश गया है। ऑटो सेक्टर धीमी रफ्तार की जगह टॉप गियर में आने की तैयारी में है। -प्रेम सागर तिवारी, केटीएल मारुति, ग्राहकों के लिए आरटीओ आफिस का अनुभव अच्छा नहीं है। सर्वर ठप हैं। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट कई दिनों की वेटिंग के बाद मिल रही हैं। डीलर, ग्राहक सभी इन अव्यवस्थाओं से परेशान हैं।-नरेंद्र शर्मा, भगवती होंडा