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गुमनाम धरोहरें: विरासतों को संभाल नहीं रहा पर्यटन विभाग, ये स्मारक खो रहे 'पहचान'

Thu, 26 Sep 2019 09:37 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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tajmahal - फोटो : tajmahal
जिस सूर स्मारक का लोकार्पण 1971 में तत्कालीन सीएम कमला पति त्रिपाठी ने किया, उसका नाम यूपी टूरिज्म की वेबसाइट तक पर नहीं है। इससे पता चलता है कि हमारी धरोहरों तक सैलानियों को पहुंचाने के लिए विभाग कितना गंभीर है। सिर्फ सूर स्मारक नहीं, अन्य पर्यटन स्थलों की भी यही स्थिति है।
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फतेहपुर सीकरी
ताजमहोत्सव के नाम पर सालभर में सिर्फ एक आयोजन करने वाला पर्यटन विभाग अपने स्मारकों का प्रचार-प्रसार तक नहीं कर पा रहा। पर्यटकों के लिए ब्रोशर तो दूर, महत्वपूर्ण स्थानों पर स्मारकों के बारे में जानकारी तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पर्यटक ताजमहल, आगरा किले और फतेहपुर सीकरी देखकर ही लौट जाते हैं। अधिकांश पर्यटक तो आगरा किला और फतेहपुर सीकरी तक भी नहीं पहुंच पाते हैं।
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सूर स्मारक - फोटो : अमर उजाला
सूर स्मारक: आगरा-मथुरा हाईवे स्थित कीठम झील के पास सूर स्मारक है। बताया जाता है कि सन् 1497 ई. में 19 वर्ष की आयु में सूरदास यहां गऊघाट पर आकर रहने लगे थे। गऊघाट पर प्राचीन ईंटें आज भी निकलती हैं। वर्ष 1971 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने यहां उनके स्मारक का लोकार्पण किया था।

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महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी स्मारक - फोटो : अमर उजाला
ग्यारह सीढ़ी: महताब बाग के पास ग्यारह सीढ़ी स्मारक स्थित है। यह एक खगोल वेधशाला का भग्नावशेष है। जोकि मुगल शासक हुमायूं द्वारा बनवाई गई थी। पर्यटक महताब बाग तो आते हैं लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यहां तक नहीं पहुंच पाते।
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चौबुर्जी - फोटो : अमर उजाला
चौबुर्जी: यह स्मारक एत्मादउद्दौला स्मारक के सामने गली में स्थित है। बताया जाता है कि मुगल बादशाह बाबर की मृत्यु के बाद उसका शव  कुछ दिन के लिए यहीं रखा गया था। इसके बाद उसके शव को काबुल ले जाया गया था। यह स्मारक उपेक्षा का शिकार है।
 
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जसवंत की छतरी - फोटो : अमर उजाला
जसवंत सिंह की छतरी: यमुना किनारे बल्केश्वर क्षेत्र में राजा जसवंत सिंह की छतरी है। इस इमारत का निर्माण शक्तिशाली मुगल मनसबदार तथा अमर सिंह राठौर के भाई मारवाड़ के महाराजा जसवंत सिंह ने करवाया था। इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं। प्रत्येक पर सुंदर पत्थर की जाली लगी हैं।
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