वहां उन्हें आंदोलन को तेज करने के निर्देश मिले। वह आगरा आए और फुलट्टी बाजार के एक मकान में गुप्त बैठक बुलाई। चुनिंदा लोग शामिल हुए और आंदोलन की रूपरेखा बनी। इसके बाद आंदोलन पूरे जिले में फैल गया। बड़े-छोटे जुलूस निकाले गए। थाने-चौकियों और सरकारी दफ्तरों के बाहर भीड़ ने मशाल लेकर प्रदर्शन किए। कई दिनों तक प्रदर्शन चले।
'आगरा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा'
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रानी सरोज गौरिहार ने कहा कि अगस्त क्रांति के आंदोलन में आगरा का नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। क्रांतिकारियों ने यहां अंग्रेजों को लोहे के चने चबवा दिए थे। फुलट्टी में बैठक के बाद आंदोलन ने स्थानीय स्तर पर रफ्तार पकड़ी थी। बेलनगंज में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था।
'अंग्रेज गिरफ्तारी के लिए आए तो भगा दिया था'
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन के शशि शिरोमणि ने बताया कि मेरे पिता प्रकाश नारायण शिरोमणी और चाचा गोपाल शिरोमणी ने स्थानीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बेलनगंज और फुलट्टी में हुए प्रदर्शनों के दौरान जब अंग्रेज गिरफ्तारी करने के लिए आए थे तो उन्हें भगा दिया था। क्रांतिकारियों ने छतों पर चढ़ कर नारे लगाए थे। अंग्रेज अफसर वहां से भाग खड़े हुए थे।