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सभी केद्र::::::::::::::::::::::::::::: हाय, मैं नेहा-दोस्ती करोगे... और आईएसआई के जाल में फंसा चार्जमैन

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- व्हाट्सएप पर हर दिन भेजता था गोपनीय दस्तावेज, वॉयस और वीडियो कॉल पर होती थी बातें
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आशीष शर्मा
आगरा। हाय, मैं नेहा शर्मा, मुझसे दोस्ती करोगे क्या...। फेसबुक पर एक मैसेज आया और ऑर्डनेंस फैक्टरी का चार्जमैन रविंद्र कुमार जाल में फंस गया। पहले प्यार भरी बातें हुईं। वीडियो कॉल पर पाकिस्तानी एजेंट ने वह सब किया, जो साइबर अपराधी लोगों को ठगने के लिए करते हैं। वीडियो बनाने के बाद लालच और ब्लैकमेलिंग दोनों तरीके से गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तान तक पहुंचाए जाने लगे।
एटीएस के मुताबिक, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कई युवतियों को अपना एजेंट बना रखा है। वह सोशल मीडिया पर लोगों को अपने जाल में फंसाती हैं। उनके निशाने पर भारत सरकार के कार्यालय और सेना से जुड़े लोग रहते हैं। दोस्ती के बाद प्यारभरी बातें होती हैं। लोग लालच में भी फंस जाते हैं। कई बार वीडियो कॉल पर बात के दौरान आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाने लगता है।
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ब्लैकमेल कर लोगों से सिम खरीदवाते हैं। उन सिम के नंबर और ओटीपी लेने के बाद पाकिस्तानी हैंडलर और एजेंट कॉलिंग करते हैं। इतना ही नहीं रुपयों का भी लालच देकर गोपनीय जानकारी ले ली जाती है। रविंद्र कुमार के मामले में भी यही बात सामने आई है।
जून 2024 में उन्हें नेहा शर्मा नाम की आईडी से फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई थी। रविंद्र कुमार ने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली। इसके बाद फेसबुक मैसेंजर पर मैसेज आने लगे। रविंद्र कुमार ने खुद को ऑर्डनेंस फैक्टरी में अधिकारी बताया था। दोनों ने व्हाट्सएप नंबर भी शेयर किए। पाकिस्तानी एजेंट हर दिन मैसेज और कॉल करती थी। शुरू में वॉयस कॉल ही हुए। बाद में वीडियो कॉल होने लगे।
पूछताछ में पता चला है कि वीडियो कॉल के दौरान आपत्तिजनक बातें भी होती थीं। रविंद्र कुमार के युवती ने वीडियो भी बना लिए थे। हर दिन 50-60 मैसेज और कॉलिंग से रविंद्र कुमार जाल में फंस गए। 8 महीने से लगातार वह गोपनीय दस्तावेज एजेंट को भेज रहे थे।

दूसरे कर्मचारी के नाम से सेव था नंबर
रविंद्र कुमार युवती से बात कर रहे थे। जानकारी पत्नी और परिजन को न हो, इसलिए रविंद्र ने अपने मोबाइल में युवती का नंबर अपनी ही फैक्टरी के दूसरे कर्मचारी के नाम से सेव कर रखा था। कई बार फोन में मैसेज आने पर पत्नी और बच्चे भी उठा लिया करते थे। तब वह यही समझते थे कि कंपनी के कर्मचारी ने मैसेज और कॉल किया हुआ है। इससे किसी को शक नहीं होता था।


सेंडिंग के बाद डिलीट

रविंद्र कुमार ऑर्डनेंस फैक्टरी में चार्जमैन होने के कारण स्टोर का कार्य भी देखते थे। वह फैक्टरी के कई व्हाट्सएप ग्रुपों से भी जुड़े थे। इन ग्रुपों पर प्रोजेक्ट और प्रोडक्शन से संबंधित जानकारियां साझा की जाती थीं। आरोप है कि इनको भी वह एजेंट को भेज दिया करते थे। कई उपकरण भी स्टोर में तैयार होकर रखे जाते थे। आशंका है कि इनको भी उन्होंने भेजा होगा। व्हाट्सएप चैट देखने के बाद कई जानकारी एटीएस के हाथ लगी है। वह दस्तावेज और फोटोग्राफ भेजने के बाद डिलीट कर दिया करते थे। अब इनको फॉरेंसिक लैब के माध्यम से रिकवर करने का प्रयास किया जाएगा।
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बैंक खातों की जानकारी जुटा रहा एटीएस

एटीएस के मुताबिक रविंद्र कुमार ने ज्यादा कुछ तो नहीं बताया है। हर बार पूछने पर वह इन्कार कर देते थे। मगर, जब उन्हें मोबाइल में मिले दस्तावेजों के बारे में बताया गया तो वह चुप हो गए। यही कहा कि वह फंस गए हैं।
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