हाईवे पर 12 मौतों के बाद सोमवार को पुलिस और आरटीओ की टीमें खानापूर्ति करती नजर आई। डीएम के आदेश के बाद हाईवे पर दौड़ने वाले आटो का लायर्स कालोनी के मोड़ पर चालान किया गया। हाईवे के दो-तीन अवैध कटों को बेरीकेडिंग लगाकर अस्थायी रूप से बंद किया गया पर, इसका कोई असर नहीं पड़ा। वाहन चालकों ने कटों से ही गाड़ियों को निकाला।
बता दें, एनएच-2 पर दो सड़क दुर्घटनाओं में 12 लोगों की मौत के बाद लोगों में प्रशासन के खिलाफ आक्रोश पनपा तो प्रशासनिक अफसरों ने संबंधित विभागों के पेच कसे। सोमवार को हाईवे से डग्गेमार बसों को खदेड़ दिया गया। वहीं हाईवे पर आटो का संचालन बंद रहने से ज्यादातर आटो सर्विस रोड पर ही चले। आटो चालकों से कहा गया है कि जहां सर्विस रोड नहीं है, वहां ही वह हाईवे पर चलें। पुलिस ने भगवान टाकीज ओवर ब्रिज से भी बसों को खदेड़ा लेकिन सारी कवायद सिकंदरा से सुल्तानगंज पुलिया चौराहे तक ही दिखाई दी। शहर के अन्य स्थानों पर डग्गेमार गाड़ियां और आटो व टेंपो फर्राटा भरते रहे। आरटीओ प्रवर्तन का कहना था कि कई स्थानों पर वाहनों के ओवरलोडिंग और परमिट आदि की चेकिंग की गई।
आरएम और आरटीओ में नोकझोंक
आईएसबीटी के बाहर से सवारियां भरने का मुद्दा उठाए जाने पर आरटीओ और रोडवेज के आरएम के बीच नोकझोंक हो गई। अधिकारियों के सामने ही आरएम ने डग्गेमार बसों के कारण रोडवेज को होने वाले नुकसान की बात उठाई। इसके बाद मीटिंग में कुछ तल्खी आ गई।
आईएसबीटी पर बने अंडरपाथ
आगरा। बैठक में आगरा पब्लिक कैरियर एसोसिएशन के अध्यक्ष चरन सिंह ने आईएसबीटी पर अंडरपाथ बनाए जाने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि इससे खंदारी फ्लाईओवर पर आने जाने वाले वाहनों की दिक्कतें खत्म होंगी। गुरुद्वारा गुरु का ताल की क्रासिंग का मुद्दा भी उठाया गया। यहां भी रांग साइड से वाहनों के आने के कारण मुश्किलें आ रही हैं।
...ताकि बची रहे लोगों की जिंदगी
आगरा। ट्रांसपोर्ट नगर पर आईएसबीटी के पास 12 घंटे में 12 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे का शिकार हुए परिवारों के आंसू नहीं रुक रहे हैं। मृतकों के परिवारीजनों का कहना है कि अगर, पुलिस और प्रशासनिक अफसर हाईवे की दुर्दशा पर ध्यान देते तो हादसे नहीं होते।
महर्षि पुरम, सिकंदरा निवासी सतीश चंद्र गुप्ता का सुभाष बाजार में कपड़े का कारोबार है। परिवारीजनों ने बताया कि उनका बेटा आशीष और हनीष हैं। सतीश रोजाना हनीष के साथ ही दुकान जाते थे। रविवार होने की वजह से हनीष देर से जागा। मगर, सतीश जल्दी दुकान पर जाना चाहते थे। बेटे के मना करने पर वह अकेले ही दुकान के लिए चल दिए। धेवती ने उन्हें स्कूटर से हाईवे तक छोड़ दिया। सतीश की मौत से परिवार का बुराहाल है। बेटे आशीष ने बताया कि उनकी कालोनी में भागवत चल रही है। इस पर पिता ने भी एक महीने बाद घर में भागवत कथा कराने का विचार बनाया था। वह तैयारी में लगे थे। मगर, उससे पहले ही हादसे का शिकार हो गए। आशीष कहते हैं कि उनके पिता की तो मौत हो गई, लेकिन आगे इस तरह से किसी की मौत न हो उसके लिए प्रशासन को कड़े प्रबंध करने चाहिए।
अब कैसे कटेगी जिंदगी
आवास विकास कालोनी के सेक्टर चार निवासी अनिल शर्मा की भी हादसे में मौत हो गई। वह दीवानी में मुंशी थे। घर में बेटा राघव और पत्नी कमलेश हैं। परिवार किराए पर रहता है। परिवारीजनों ने बताया कि अनिल रविवार को किसी काम की कहकर घर से निकले थे। अनिल के मोबाइल में उनकी बहन का नंबर दीदी के नाम दर्ज था। पुलिस ने बहन को ही हादसे की जानकारी दी थी। पिता की मौत से बेटे राघव का बुरा हाल है। बेटा डेयरी पर काम करता है।
नहीं बचा परिवार का सहारा
नार्थ विजय नगर कालोनी निवासी मृतक सुभाष सिंह आटो चालक था। उसके घर मेें पत्नी चंद्रकला, बेटा सचिन (10), आरती (6), नीटो (4) और बेटी हिमांशी (2) हैं। सुभाष की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है। परिवार का कोई भी सहारा नहीं हैं। घरवालों ने बताया कि परिवार किराये पर रहता है। सुभाष हर दिन जो कमाकर लाता था उसी से घर का चूल्हा जलता था। उसके परिवारीजनों का कहना था कि अगर, पुलिस के उचित प्रबंध होते तो हादसा नहीं होता।