पुलिस की पूछताछ में पता चला कि आकाश, उसका फुफेरा भाई दुष्यंत और चचेरा भाई विशाल सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। उनका संपर्क गांव के ही जितेंद्र से हुआ। जितेंद्र ने तीनों को सेना में भर्ती कराने का आश्वासन दिया।
इसके लिए एक अभ्यर्थी के 5.5 लाख रुपये मांगे। उनसे बरेली में आयोजित होने जा रही सेना भर्ती के लिए आवेदन कराया। लेकिन, वह बुलंदशहर के रहने वाले हैं। उन्हें बरेली के दस्तावेज तैयार कराने थे।
जितेंद्र गिरोह के सरगना आगरा के उदय और राकेश चौधरी का एजेंट है। वो बेरोजगार युवकों को ढूंढने का काम करता है। तीनों भाइयों से 10.5 लाख रुपये ले लिए थे। बाकी रकम बाद में देने वाले थे। जितेंद्र आकाश उसके पिता अजय को उदय से मिलाने लाया था, तभी पुलिस ने पकड़ लिया।
एसपी सिटी के मुताबिक, गिरोह के सरगना हाथरस के सादाबाद निवासी सतीश, गांव बुढै़रा निवासी राकेश चौधरी, बुढ़ाना निवासी उदय यादव हैं। राकेश की मां सावित्री देवी गांव बुढ़ैरा की प्रधान हैं। राकेश चौधरी उदय के साथ काम करता है। राकेश फरार है।
आरोपी उदय सिंह यादव वर्ष 2017 में सेना में क्लर्क के पद पर भर्ती हुआ था, लेकिन कुछ माह बाद ही नौकरी छोड़ दी। वह फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर लोगों से ठगी के काम में जुड़ गया। उसने बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान भी खोल ली। गिरोह के कुछ सदस्य शामली में भी पकडे़ गए हैं। इनमें वांछित सतीश भी है।
पुलिस जल्द ही उससे पूछताछ करेगी। सतीश के खिलाफ थाना नाई की मंडी में पूर्व में भी मुकदमा दर्ज है। वह जेल भेजा गया था। धौलपुर के राजखेड़ा निवासी सुरेंद्र, शामली निवासी सरविंद्र, बाह निवासी साधु यादव और मेरठ निवासी सचिन मुकदमे में वांछित हैं।
फर्जी दस्तावेज से सेना में भर्ती कराने का ठेका लेनें वाले गिरोह ने अपना जाल पूरे उत्तर प्रदेश में फैला रखा है। गिरोह के सदस्य गांव-गांव और मोहल्ले मोहल्ले बेरोजगार सेना भर्ती के इच्छुक युवाओं से संपर्क करते हैं। उनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर भर्ती परीक्षा दिलाते हैं।
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद के मुताबिक, गिरोह बरेली, सीतापुर, मेरठ, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, आगरा सहित प्रदेश के सभी जिलों में फैला हुआ है। गिरोह के एजेंट सेना भर्ती देखने आने वालों से संपर्क करते हैं।
जो लोग भर्ती वाले जिलों के नहीं होते हैं उनसे फर्जी निवास, जाति, मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कहते हैं। इसके लिए एक अभ्यर्थी से 5.5 से छह लाख रुपये तक लेते हैं। इसके लिए इंटरनेट से ग्राम प्रधानों और पार्षदों के नाम की जानकारी लेते हैं। उनके लेटर पैड ढूंढते हैं। उन्हीं की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं।
गिरोह उन्हीं लोगों को टारगेट पर लेते थे जो किसी कारण से भर्ती में शामिल नहीं हो पाते थे। सेना में अलग-अलग जिलों के हिसाब से परीक्षा होती है। यदि कोई अभ्यर्थी अपने जिले की परीक्षा में फेल हो गया। उसे दूसरे जिले की परीक्षा में बैठना है तो उसकी मदद गिरोह करता था।