अवैध विदेशी हथियार और लाइसेंस के फर्जीवाड़े की विवेचना कछुआ गति से चल रही है। पहले दिन ही विवेचना एसटीएफ को ट्रांसफर कर दी गई थी। एक सप्ताह बाद भी न हथियार जब्त किए गए हैं, न ही आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकी है। इससे आरोपियों को बचने का माैका मिल रहा है। कई पुलिसवालों की आरोपियों से मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। विवेचना में लेटलतीफी से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोपियों पर 3 अलग-अलग थानों में केस दर्ज हुए हैं।
वहीं जिन हथियारों को अवैध बताया गया है, वह भी जब्त नहीं हुए हैं। यह आरोपियों के पास ही है। इनके लाइसेंस भी निरस्त नहीं कराए गए हैं। पुलिस और एसटीएफ की कछुआ गति से कार्रवाई से आरोपियों को बचने का माैका भी मिल रहा है।
पहला केस
24 मई को थाना नाई की मंडी में लिखा गया था। यह एसटीएफ के निरीक्षक यतेंद्र शर्मा ने लिखाया था। इसमें मोहम्मद जैद खान, मोहम्मद अरशद खान, राजेश कुमार बघेल, भूपेंद्र सारस्वत, शिवकुमार सारस्वत, शोभित चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त एएलसी प्रथम संजय कपूर को नामजद किया गया था।
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दूसरा केस
थाना सिकंदरा में 28 मई को लिखा गया। इसमें भूपेंद्र सारस्वत, अमित, सोनू गाैतम और शोभित चतुर्वेदी को नामजद किया गया। आरोप लगाया था कि शिकायतकर्ता विशाल भारद्वाज की 20 लाख रुपये में कुख्यात अपराधी सोनू गाैतम को हत्या की सुपारी दी गई।
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तीसरा केस
थाना जगदीशपुरा में 30 मई को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम भदाैरिया की तहरीर पर लिखा गया। उन्होंने आरोप लगाया था कि भूपेंद्र के पिता शिवकुमार सारस्वत ने उन्हें एक पिस्टल बेची थी। इसके मूल दस्तावेज नहीं दिए। इसके अवैध होने की आशंका जताई।
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