उनसे क्रय-विक्रय और रकम देने के सुबूत मांगे गए। उन्होंने बताया कि शिव कुमार से संपर्क किया। मगर, वो टालमटोल करता रहा। पिता-पुत्र ने उन्हें रसीद नहीं दी। इससे धोखाधड़ी की आशंका हुई। आशंका जताई कि विदेशी पिस्टल बताकर अवैध फैक्टरी में बनी पिस्टल को बेच दिया गया। तहरीर में पिस्टल की फोरेंसिक जांच की भी मांग की है। उधर, एसटीएफ ने भाजपा नेता को गवाह बनाया है। उनके कोर्ट में भी बयान कराए जाएंगे। इससे साबित हो जाएगा कि यह गिरोह अवैध पिस्टल की बिक्री करता है। आरोपियों के पकड़े जाने पर भी कई और जानकारी हाथ आ सकती हैं।
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गिरोह के संबंध कई उद्योगपतियों से भी
मीडियाकर्मी शोभित चतुर्वेदी की पहचान कई बड़े अधिकारियों, पुलिसकर्मियों के साथ उद्योगपतियों से भी थी। एसटीएफ के सूत्रों का कहना है कि गिरोह ने बड़े उद्योगपतियों को भी हथियारों की बिक्री कराई है। उन्हें विश्वास दिलाया गया कि हथियार असली हैं। ऐसे में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कई और लोगों के बारे में जानकारी मिल सकती है।
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भूपेंद्र ने सरेंडर कर दिए लाइसेंस, नहीं लगी भनक
फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण की जांच शुरू होते ही आरोपियों ने भी बचने की तैयारी शुरू कर दी थी। प्रशासन को शिकायत मिली लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। मुख्यमंत्री के पास मामला पहुंचा तो एसटीएफ ने जांच की। अगस्त, 2024 से आगरा इकाई के निरीक्षक जांच करने लगे। इसकी जानकारी आरोपियों को हो गई।
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