साहित्यकार राम सिंह वाही (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
उपन्यास से लेकर फिल्मी कहानियों तक का सफर तय करने वाले आगरा के बाह निवासी रामसिंह वाही अब दुनिया में नहीं रहे। शनिवार की सुबह उन्होंने अपने पैतृक निवास बाह में ही अंतिम सांस ली। उनके शोक में पूरा बाह डूब गया। बाजार बंद रहा। उनकी ही कहानी पर अनपढ़ और अधिकार फिल्म बनी थी।
भदावर इंटर कॉलेज में कला के शिक्षक रहे राम सिंह को अखबारों में प्रकाशित व्यंग्य कार्टूनों से वाही उपनाम मिला था। 90 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले राम सिंह वाही ने फाइन आर्ट में गोल्ड मेडल जीता था।
अखिल भारतीय कहानी प्रतियोगिता में तीसरे नंबर पर रहे थे। अनगिनत कहानी और उपन्यास लिखने वाले राम सिंह वाही की कहानियों पर दो फिल्में अधिकार और अनपढ़ बनी। कहानियों से ही वे दादामुनि अशोक कुमार के चहेते बने।
भदावर नाट्य कला मंच के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को बढ़ावा देने वाले साहित्यकार राम सिंह वाही अपने घर के आंगन में पत्नी शांती देवी, बेटे सुभाष वर्मा, पौत्र सौमित्र, प्रपौत्र मौलिक आदि चार पीढ़ियां छोड़ गए हैं।
शनिवार को शोक में बाह का बाजार बंद रहा। उनको अंतिम विदाई देने के लिए बाह से बटेश्वर तक लोगों का हुजूम उमड़ा रहा। सभी की जुबान पर उनके साहित्यिक सफर की ही बातें थीं।