बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने इसकी जांच दो स्तर से कराने का निर्णय लिया। पहली जांच डीसी बालिका शिक्षा से कराई गई। इनकी रिपोर्ट भी गुरुवार को प्राप्त हो गई। रिपोर्ट में यह साबित हुआ है कि शिक्षिका दीप्ति बेवर में तैनात अनुदेशक दीप्ति के अभिलेखों से ही नौकरी कर रही हैं।
शिक्षिका के विरुद्ध होगी एफआईआर
बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि शिक्षिका को नोटिस भेजा गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुईं। प्रथम जांच में भी यह साबित हुआ है कि शिक्षिका अनुदेशक के अभिलेखों से नौकरी कर रही हैं।
शिक्षिका का वेतन रोकते हुए उसके खिलाफ एफआईआर की तैयारी शुरू कर दी गई है। दो सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट आते ही शिक्षिका के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। शिक्षिका की बर्खास्तगी को लेकर भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
दूसरी तरफ विभाग ने अनुदेशक दीप्ति सिंह को भी प्रथम जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाया है। जांच रिपोर्ट से ये साबित हुआ है कि अनुदेशक ने स्वयं ही शिक्षिका को अपने अभिलेख दिए थे और बाद में मनमाफिक धनराशि न मिलने पर शिकायत कर दी। फिर जब मनमाफिक धनराशि मिल गई तो शिकायत वापस भी ले ली। अनुदेशक का मानदेय रोका गया है।
बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि प्रथम जांच में शिक्षिका के अभिलेख फर्जी पाए गए हैं। फिर भी दो सदस्यी जांच टीम की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्रथम जांच में ये भी साबित हुआ है कि अनुदेशक ने स्वयं ही अपने अभिलेख शिक्षिका को दिए थे।
इसके आधार पर अनुदेशक का भी मानदेय रोका गया है। वहीं शिक्षिका का वेतन रोकने के साथ ही बर्खास्तगी और एफआईआर की तैयारी शुरू कर दी गई है।