कथावाचक अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर प्रवचन को लेकर फंस गए हैं। इस बार उन्होंने टिप्पणी माता सीता और द्रोपदी पर की, जिसे लेकर आक्रोशित लोगों ने उनका पुतला फूंंक दिया।
मथुरा के वृंदावन में महर्षि वाल्मीकि पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद पिछले दिनों वृंदावन के एक समारोह के मंच से श्रीमद्भागवत में राधा नाम है अथवा नहीं को लेकर विवादों में घिरे कथा प्रवक्ता अनिरुद्धाचार्य के विरोध में फिर स्वर उठ रहे हैं। ताजा मामला माता सीता और द्रौपदी पर दिए गए वक्तव्य को लेकर है।
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कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अपने वक्तव्य में दोनों देवियों के अति रूपवती होने को ही उनका अवगुण बताया है। इस वक्तव्य का वीडियो वायरल होने के बाद लोग नाराज हो उठे। 25 सेकेंड के वायरल हो रहे वीडियो में अनिरुद्धाचार्य कथा के दौरान कह रहे हैं कि स्त्री का जरूरत से ज्यादा सुंदर होना दोष है। माता सीता का हरण क्यों हुआ, क्योंकि वह जरूरत से ज्यादा सुंदर थीं। द्रौपदी की भरी सभा में साड़ी क्यों खींची गई, क्योंकि द्रौपदी भी जरूरत से ज्यादा सुंदर थीं। इसे वक्तव्य के बाद अनिरुद्धाचार्य का विरोध हो रहा है।
ये उचित नहीं...
मथुरा के दीर्घ विष्णु मंदिर के महंत कांतानाथ चतुर्वेदी ने कहा कि भागवत प्रवक्ता अनिरुद्धाचार्य का माताओं के बारे इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना उचित नहीं हैं। विद्वानों को अपनी भाषा को संतुलित रखकर ही बोलना चाहिए। इधर, स्थानीय निवासी पवन शर्मा, आनंद शर्मा, प्रशांत यादव, विनोद, शंतनु, आकाश गौतम, सुनील गौतम आदि ने पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया।
कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि माता सीता अति रूपवती थीं, इस कारण हरण हुआ। हमने अति सर्वत्र वर्जते की व्याख्या की है। अति हर जगह गलत है। इसी तरह अति सुंदरता गुण नहीं है, दोष है। क्या द्रौपदी और माता सीता अति सुंदर नहीं थीं।