आगरा। नगर निगम और जलनिगम की लड़ाई में पानी और सीवर लाइन के काम के लिए कारण खोदी गई शहर की दो प्रमुख सड़कें नहीं बन सकी हैं। नगर निगम को शंकरगढ़ पुलिया-अलबतिया रोड और अवधपुरी-मारुति एस्टेट रोड का निर्माण 31 मार्च तक करना था। अब जलनिगम के काम अधूरे बताकर नगर निगम ने इन दोनों सड़कों का निर्माण करने से इनकार कर दिया है, जबकि जलनिगम का दावा है कि उनके काम पूरे हो चुके हैं और नगर निगम ने निर्माण के लिए दोनों सड़कें उनसे हैंडओवर कर ली थीं।
यह दोनों सड़कें 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत की गई थीं, जिन पर 3.56 करोड़ रुपये की लागत से डामरीकरण किया जाना था। 31 मार्च तक निर्माण न होने के कारण अब नगर निगम को इसे बनाने के लिए फिर से मंजूरी लेनी होगी, जिससे अब दोनों सड़कों का निर्माण बारिश के बाद ही संभव है। तब तक इन दोनों सड़कों से निकलने वाले 70 हजार से ज्यादा लोगों को परेशानी झेलनी होगी।
31 मार्च तक दोनों सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी, लेकिन जलनिगम, नगर निगम की आपसी लड़ाई और लापरवाही ने लोगों की मुसीबतें बढ़ा दीं। नगर निगम को लखनऊ से वित्त आयोग के इस बजट के इस्तेमाल के लिए अनुमति लेनी होगी। तब तक मानसून आ जाएगा। सड़क निर्माण पर रोक लग जाएगी। खोदाई के कारण निगम के इंजीनियर भी मान रहे हैं कि बारिश के बाद ही मिट्टी का कॉम्पेक्शन हो सकेगा, इसलिए इन दोनों सड़कों का निर्माण सितंबर के बाद ही संभव है।
अमर उजाला ने दिसंबर में अलबतिया रोड और मारुति एस्टेट रोड को सीवर, पानी की लाइन के लिए खोदकर छोड़ देने से लोगों को हो रही परेशानी को उजागर किया था। तब जलनिगम ने 25 दिसंबर तक दोनों सड़कों के निर्माण का वादा कमिश्नर अमित गुप्ता से कर दिया, पर 31 मार्च तक भी दोनों सड़कों का निर्माण नहीं हो सका। फरवरी और मार्च में अमर उजाला दोनों विभागों के अधिकारियों के सामने लोगों की मुश्किलें और 15 वें वित्त आयोग का बजट लैप्स हो जाने की आशंका लगातार जताता रहा, पर न जलनिगम अधिकारियों ने काम किया, न नगर निगम ही सड़क बना सका।
हमारा काम पूरा, निगम नहीं बना रहा
जलनिगम से काम पूरा कर खोदाई वाले हिस्सों पर गिट्टियां (जीएसबी) डालने को कहा गया था। दो दिन पहले हमारा काम पूरा हो गया, लेकिन नगर निगम ने सड़क बनाने से इनकार कर दिया। अगर वह नहीं बनाएंगे तो हमने जितनी रोड कटिंग की है, उस पर बिटुमिन (तारकोल से पैचवर्क) करा देंगे। अगर निगम को नहीं करना था तो हम पहले ही सड़क बना देते। - महेश कुमार गौतम, प्रोजेक्ट मैनेजर, जलनिगम, विश्व बैंक इकाई
हम दो महीने से जलनिगम से सड़क पर काम पूरा करने के लिए कह रहे थे, पर उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई। हम रोजाना स्टेटस लेते रहे। अब दो दिन पहले उन्होंने कहा कि सड़क बना दें। 31 मार्च तक सड़क बनाकर भुगतान कराना नामुमकिन था, इसलिए हमने मना कर दिया। 15वें वित्त आयोग के बजट के लिए फिर से अनुमति लेनी होगी। - बीएल गुप्ता, चीफ इंजीनियर, नगर निगम
वीआईपी आते हैं तो सड़क रातोंरात बन जाती है। अब क्यों नहीं बनाई गई। नगर निगम के इंजीनियरों ने लापरवाही दिखाई है। मेरे क्षेत्र की इस सड़क के मामले को सदन में रखूंगा। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। - राहुल चौधरी, पार्षद
हमें उम्मीद थी कि 31 मार्च तक सड़क बन जाएगी। हमारा ऐसा क्या कसूर है कि बाकी जगह सड़कें खोदकर बना दीं, पर हमारी छोड़ दीं। हजारों गड्ढों के कारण क्षेत्र में कोई ऐसा घर नहीं, जहां तीन से चार सदस्य पीठ दर्द, कमर दर्द, रीढ़ की हड्डी के दर्द से न जूझ रहे हों। - योगेंद्र कुमार, निवासी, अलबतिया रोड