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ढ़ाई महीने बाद भी पुलिस नहीं ढूढ सकी दीप्ति का ठिकाना

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मैनपुरी। फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी हासिल करने वाली अनुदेशिका दीप्ति और शिक्षिका दीप्ति कहां हैं पुलिस इसका ढाई महीने बाद भी सुराग नहीं लगा सकी है। रिकार्ड में दर्ज पते पर भी दोनों नहीं मिली हैं। शुक्रवार को जांच प्रभारी आरएन सिंह ने बीएसए कार्यालय पहुंचकर संबंधित रिकार्ड को चेक किया।
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अनामिका शुक्ला प्रकरण के साथ ही जिले में कस्तूरबा गांधी विद्यालय करहल की शिक्षका दीप्ति और उच्च प्राथमिक विद्यालय जमौरा में तैनात अनुदेशिका दीप्ति की जांच शुरू हुई थी। बीएसए द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच टीम ने दोनों के अभिलेख फर्जी पाए थे।
दोनों दीप्ति ने फर्रुखाबाद के थाना कायमगंज क्षेत्र के गांव बगिया सोहनलाल निवासी सुरेश चंद्र की पुत्री दीप्ति के अभिलेखों से नौकरी हासिल की थी। असली दीप्ति कौशांबी के मिश्रपुर ढहैया के राजकीय हाईस्कूल में सहायक अध्यापिका के पद पर तैनात है।
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जांच समिति की रिपोर्ट के बाद चयन समिति ने दोनों का चयन फर्जी मानते हुए 16 जून को सेवा समाप्त कर दी थी। 17 जून को दोनों के विरुद्ध कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस तब से लगातार उनकी तलाश में जुटी है। ढाई महीने बाद भी दोनों का पता नहीं चल सका है। शुक्रवार को मामले की जांच कर रहे जांच प्रभारी आरएन सिंह ने बीएसए कार्यालय पहुंचकर करीब ढाई घंटे तक सारे रिकार्ड खंगाले।
इन बिंदुओं पर हासिल किए रिकार्ड
- दीप्ति प्रकरण कब संज्ञान में आया
-दीप्ति प्रकरण की जांच कब-कब हुई
- जांच टीम में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे
- किस अधिकारी ने कब अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी
- किस आधार पर दोनों दीप्ति को माना गया फर्जी
- विभाग में दर्ज रिकार्ड के अनुीसार उनका पता क्या है
इन टीमों ने की थी जांच
जांच समिति में खंड शिक्षाधिकारी बेवर जेपी पाल, खंड शिक्षाधिकारी करहल रामशंकर कुरील, डीसी बालिका शिक्षा ब्रजेश शाक्य और डीसी प्रशिक्षण धीरेंद्र सिंह चौहान शामिल थे। वहीं चयन समिति में प्राचार्य डायट नरेंद्र पाल सिंह, बीएसए विजय प्रताप सिंह, डिप्टी कलक्टर प्रेमप्रकाश मौर्य, प्रधानाचार्य जीजीआईसी सुमन यादव शामिल थीं।
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