इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा काॅशिंयसनेस (इस्कॉन) की ओर से आयोजित मेगा यूथ फेस्ट 'आरंभ-2' में शनिवार को प्रेरक वक्ता अमोघ लीला प्रभु ने युवाओं से संवाद किया। ‘एआई, सोल एंड फ्यूचर ऑफ ह्यूमन्स’ विषय पर बोलते हुए मोबाइल, इंटरनेट और एआई की तिकड़ी में फंसी युवा पीढ़ी को भविष्य की कड़वी हकीकत से रूबरू कराया। कहा जो भी युवा जीवन में तरक्की करना चाहते हैं वो जल्द से जल्द स्मार्ट फोन से छुटकारा पा लें।
अपने चिर-परिचित मजाकिया और तार्किक अंदाज में उन्होंने युवाओं से सीधे सवाल किया कि तकनीक का इस्तेमाल कौन-कौन करता है? इसके बाद शुरू हुआ तथ्यों और सीख का सिलसिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को सोचने पर मजबूर कर दिया। अमोघ लीला प्रभु ने एक सर्वे का हवाला देते हुए बताया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया की लत के कारण आज देश का 43 प्रतिशत युवा नौकरी के लायक ही नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि घंटों रील्स देखने और इंटरनेट पर समय बिताने से युवाओं में एकाग्रता खत्म हो रही है। एआई पर बढ़ती निर्भरता हमारी मौलिक सोच को निगल रही है। मोबाइल एप्स युवाओं को उनके कॅरिअर और जीवन के वास्तविक उद्देश्यों से दूर ले जा रहे हैं।
उन्होंने आधुनिक जीवनशैली पर प्रहार करते हुए कहा, जब साधन नहीं थे, तब हमारे पास समय था, आज साधन हैं, तो समय ही नहीं है। कहा कि इंटरनेट की आभासी दुनिया में जीने वाले बच्चे वास्तविक जीवन से कट जाते हैं। आज मैदान में खेले जाने वाले खेल भी मोबाइल पर ही खेले जा रहे हैं। ऐसे में सेहत भी बिगड़ रही है और शारीरिक-मानसिक तनाव भी हो रहा है। उन्होंने डिजिटल दुष्चक्र से निकलने का मार्ग भी बताया। तकनीक का सीमित और सही उपयोग करने की सलाह दी। सत्र के अंत में प्रश्नोत्तर दौर हुआ, जिसमें युवाओं ने एआई और कॅरिअर के द्वंद्व पर अपनी शंकाएं दूर कीं।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी, डीसीपी अभिषेक अग्रवाल, संजीव मित्तल, डॉ. रंजना बंसल, सुशील अग्रवाल, नितेश अंग्रवाल, संजीव बंसल, कांता प्रसाद अग्रवाल, अदिति गौरांगी, शैलेश बंसल, राजेश उपाध्याय, डॉ. सुशील गुप्ता, डॉ. गिरधर शर्मा, डॉ. अंकुर गोयल, ओमप्रकाश अग्रवाल, अशु मित्तल, अरविंद प्रभु आदि मौजूद रहे।