31एमएनपी-25-जिला अस्पताल में खड़ीं एंबुलेंस
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मैनपुरी। चेतावनी के बाद भी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो 102 और 108 एंबुलेंस चालक व ईएमटी ने मंगलवार को एंबुलेंस खड़ी कर दीं। करीब दो घंटे तक जिले में एंबुलेंस सेवा प्रभावित रही। इससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
108 व 102 एंबुलेंस सेवा के चालक व ईएमटी ने रविवार को चेतावनी दी थी कि उन लोगों को न तो तीन महीने से मानदेय मिला है और न ही कोरोना वायरस को लेकर उनकी सुरक्षा की तरफ ध्यान दिया जा रहा है। एंबुलेंस चालकों ने सैनिटाइजर और दस्ताना उपलब्ध न होने की बात भी कही थी। इसके अतिरिक्त कोरोना वायरस के दौरान अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की तरह 50 लाख के बीमा की मांग की थी। मंगलवार को 12 बजे तक का समय दिया था लेकिन जब 12 बजे तक शासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो जिले की एंबुलेंस सेवा मंगलवार की दोपहर 1:30 बजे बंद कर दी गई। प्रदेशीय नेतृत्व के आह्वान पर चालक और ईएमटी एंबुलेंस खड़ी करके जिला अस्पताल में एकत्रित हो गए।
एंबुलेंस सेवा बाधित होने की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह, एसपी अजय कुमार पांडेय के साथ जिला अस्पताल पहुंच गए। यहां चालक व ईएमटी को सुरक्षा के लिए दस्ताना व सैनिटाइजर उपलब्ध कराए। वहीं मानदेय के संबंध में उच्चाधिकारियों से बात की। डीएम के आश्वासन के बाद करीब साढ़े तीन बजे से जिले में दो घंटे के ब्रेक के बाद एंबुलेंस सेवा शुरू की जा सकी। शहर सहित सभी सीएचसी और पीएचसी पर भी एंबुलेंस चालक व ईएमटी ने प्रदर्शन किया।
इन्हें उठानी पड़ी दिक्कत
राजा का बाग निवासी रमेश चंद्र की पत्नी मालती देवी की तबियत खराब हुई तो परिजनों ने 108 एंबुलेंस के लिए कॉल किया लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद परिजन मालती देवी को बाइक से लेकर ही अस्पताल पहुंचे। आवास विकास निवासी सुभाष चंद्र को गंभीर हालत में सैफई के लिए जिला अस्पताल से रेफर किया। यहां एंबुलेंस न मिलने के कारण वे सैफई नहीं जा सके और एक घंटे तक जिला अस्पताल में ही रहना पड़ा। औडेंय निवासी संगीता देवी ने सोमवार को जिला महिला अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। मंगलवार को उन्होंने घर जाने के लिए एंबुलेंस को कॉल किया लेकिन एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं हु़ई।