कासगंज जिले के कस्बा पटियाली में मानवता को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। यहां एक एंबुलेंस चालक कुपोषित मां-बेटे को अस्पताल के बाहर छोड़कर चला गया। स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस चालक की लापरवाही की शिकायत कार्यदायी संस्था से करने की बात कही है।
थाना दरियावगंज क्षेत्र निवासी सुनीता के पति श्रीकृष्ण जाटव की मौत एक साल पहले हो गई। इसके बाद से परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उस पर आ गई। वो मेहनत-मजदूरी कर अपना और बच्चे का पेट भरने लगी, लेकिन आय अधिक न होने से पूरा परिवार कुपोषण का शिकार हो गया, किसी ने सुध नहीं ली।
जब उसकी हालत अधिक बिगड़ी तो ग्राम प्रधान ने एंबुलेंस को बुलाकर सुनीता व उसके छह वर्षीय बेटे नगेंद्र को अस्पताल भिजवा दिया, लेकिन एंबुलेंस चालक ने मां-बेटे को अस्पताल में भर्ती न कराकर गेट के बाहर ही छोड़ दिया। वो दोनों इतने कमजोर थे कि चल तक नहीं पा रहे थे। वहीं जमीन पर लेट गए।
जब लोगों की नजर मां-बेटे पर पड़ी तो मामले की जानकारी अस्पताल स्टाफ को दी। इसके बाद स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू यादव ने पहुंचकर मां-बेटे को अस्पताल में भर्ती किया। मां-बेटे का प्राथमिक उपचार करने के बाद हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
एक माह पहले हो गई मासूम की मौत
महिला के तीन साल के बेटे गोविंद की मौत भी एक माह पहले परिवार की तंगहाली के चलते बीमारी से हो चुकी है। जबकि पति श्रीकृष्ण की मौत एक साल पहले बीमारी से हो गई।
सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ
महिला के परिवार को किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। उसको न तो विधवा पेंशन का ही लाभ मिल रहा और न हीं राशन योजना का। इसके साथ ही परिवार के भरण पोषण के लिए मनरेगा योजना का भी जॉब कार्ड नहीं बना है।
एंबुलेंस चालक के लिए यह है नियम
पटियाली स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू यादव ने बताया कि एंबुलेंस के माध्यम से आने वाले किसी भी मरीज को नियमानुसार अस्पताल में भर्ती कराना होता है, लेकिन चालक ने मां-बेटे को अस्पताल में भर्ती न कराकर गेट के बाहर छोड़ दिया।
सीएमओ डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव ने बताया कि मामला संज्ञान में आने पर गंभीरता से लिया गया है। चालक ने अपने कर्तव्य का सही ढंग से पालन नहीं किया है। उसके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की संस्तुति सहित कार्यदायी संस्था को शिकायत भेजी जाएगी।
आंगनबाड़ी की लापरवाही की होगी जांच
प्रभारी डीपीओ अजय यादव ने कहा कि विभाग के माध्यम से छह साल तक के बच्चे या गर्भवती महिला के लिए ही पोषाहर की व्यवस्था है। आंगनबाड़ी के स्तर से जो भी लापरवाही की गई है उसकी जांच की जाएगी। जांच में लापरवाही होने पर कार्रवाई होगी।