भारत रत्न, संविधान शिल्पी डा. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर शहर भर में उनका एक ही संदेश गूंजता रहा कि शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। फाइबर के हाथियों पर विराजमान बाबा साहब की शोभायात्रा निकाली गई, जिसके पीछे अंबेडकर अनुयायियों का कारवां रात भर चलता रहा। नाला काजीपाड़ा से निकाली गई मुख्य शोभायात्रा में 5 दर्जन से ज्यादा झांकियों में सामाजिक चेतना जगाने और देश के ज्वलंत मुद्दों को दर्शाया गया।
डा. बीआर अंबेडकर जयंती समारोह समिति की ओर से नाला काजीपाड़ा से बाबा साहब की सवारी निकाली गई। इसमें अंबेडकर अनुयायियों का सैलाब उमड़ पड़ा। टीला शेख मन्नू, नाला काजीपाड़ा के अंबेडकर भवन से निकाली गई शोभायात्रा में फाइबर के हाथी पर डा. अंबेडकर की अष्ट धातु की प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र प्रताप और एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह के साथ पूर्व विधायक गुटियारी लाल दुवेश ने प्रतिमा का माल्यार्पण और आरती उतारकर शोभायात्रा का उद्घाटन किया। झांकियों के आगे बैंड बजते हुए जा रहे थे। शोभायात्रा काजीपाड़ा, चक्कीपाट, बिजलीघर, छीपीटोला, बर्फखाना, रावली, सदर भट्टी, मंटोला, ढोलीखार, मदीना होटल से सुभाष बाजार, रावतपाड़ा, पीपलमंडी, धूलियागंज, फुलट्टी, किनारी बाजार, हींग की मंडी, ईदगाह, नामनेर, सांई की तकिया, छीपीटोला होते हुए नाला काजीपाड़ा पर सुबह समाप्त होगी।
बिजली गुल होने से पड़ा खलल
शोभायात्रा में दूसरा हाथी भीम नगरी केंद्रीय समिति ने बिजलीघर चौराहे से निकाला। यहां भी फाइबर के हाथी पर विराजमान डा. अंबेडकर की प्रतिमा को आरती के बाद एमएलसी सुनील कुमार चित्तौड़ ने रवाना किया। भीमनगरी केंद्रीय कमेटी अध्यक्ष भरत सिंह, धर्मेंद्र सोनी के साथ कमेटी पदाधिकारियों ने दो घंटे तक बिजली गुल रखने पर आपत्ति जताई। अध्यक्ष भरत सिंह ने बताया कि पहली बार अंबेडकर जयंती पर दो घंटे बिजली गुल रखी गई। इससे शोभायात्रा में न केवल व्यवधान पड़ा, बल्कि देरी भी हुई। बिजली के नीचे और ढीले तारों के कारण भी अंबेडकर प्रतिमा को ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
शोभायात्रा में ये रहे मौजूद
डा. बीआर अंबेडकर जयंती समारोह समिति अध्यक्ष चौ. भीकम सिंह सेक्सरिया, महासचिव सुरेंद्र सिंह सेक्सरिया, श्याम बाबू, निहाल सिंह, लाखन सिंह, सुरेश चंद्र, रविंद्र कुमार, ओम प्रकाश, चौ. बाबूलाल, राजाराम, रामचरन अंबेश, कृष्ण कुमार, रूप सिंह, मान सिंह कर्दम, दीपचंद आदि मौजूद रहे।
तीन तलाक, बूचड़खाने, कर्ज माफी पर कसा तंज
आगरा। हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा। संसद भवन का चित्र दिखाकर भारतीय राजनीति और वतन के हालात पर तंज कसने वाली एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनों ऐसी झांकियां थी, जिनमें राजनेताओं पर निशाना साधा गया। तीन तलाक, अवैध बूचड़खाने बंद कराने, किसानों की कर्ज माफी जैसे मुद्दों वाली झांकियां भी शोभायात्रा का हिस्सा बनीं। पांच दर्जन से ज्यादा झांकियों में अधिकांश में डा. अंबेडकर के शिक्षा के संदेश नजर आए, लेकिन कई झांकियों में केंद्र और राज्य सरकार पर तंज कसे गए।
तीन तलाक की झांकी से आगे आजादी की मांग वाली झांकी निकाली गई। इसमें संघवाद, सामंतवाद, जातिवाद से आजादी मांगी गई। प्रदेश सरकार के कर्ज माफी के एलान को ढकोसला बताया गया। सरकार के झूठे वायदों पर भी झांकी रखी गई। अवैध बूचड़खानों के बंद होने के साथ प्रदेश में शराब, गुटखा और नशीले पदार्थों की बिक्री रोकने की मांग झांकियों के जरिए उठाई गई।
नीले रंग में रंगा शोभायात्रा मार्ग
डा. अंबेडकर शोभायात्रा मार्ग नीली रोशनी से नहाया हुआ था। बिजलीघर का अंबेडकर पार्क, चक्की पाट, छीपीटोला से औलिया रोड, रामलीला मैदान केसामने, आगरा फोर्ट स्टेशन रोड और नाला काजीपाड़ा रोड पर नीली झालरें सड़क के दोनों ओर लगाई हुई थीं।
गर्मी ने किया अनुयायियों को परेशान, दो घंटे लेट
अंबेडकर जयंती पर पारा 42 डिग्री के करीब पहुंच गया। तेज गर्मी के कारण शाम छह बजे की जगह डा. अंबेडकर शोभायात्रा निकालने में देरी हुई। करीब दो घंटे लेट होने से उद्घाटन रात आठ बजे हो सका तो रात 10 बजे तक तो झांकियां निकल ही न सकीं। लोग पैदल ही नाला काजीपाड़ा की ओर पहुंचे, लेकिन शोभायात्रा के लेट निकलने से मायूस होना पड़ा। गर्मी के कारण पैदल चल रहे लोग पसीने से तरबतर नजर आए।
दुल्हन सी सजी भीम नगरी
तीन दिवसीय भीमनगरी का उद्घाटन तो आज होगा, लेकिन टेढ़ी बगिया, कालिंदी विहार का क्षेत्र दुल्हन की तरह से सज चुका है। आकर्षक विद्युत सजावट के कारण भीमनगरी की छटा देखते ही बन रही है। शोभायात्रा के स्वागत के लिए बड़े-बड़े तोरणद्वार बनाए हैं। पिछले करीब 20 दिनोें से भीम मंच का निर्माण कार्य चल रहा था, शुक्रवार शाम को निर्माण कार्य पूरा होने के बाद रंग बिरंगी रोशनी से नहाए भीम मंच को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।