आगरा के पिढ़ौरा में आठ साल पहले बरात चढ़ाई के दौरान बलवा हुआ था। दलित की बेटी की शादी के दौरान बरात पर पथराव किया गया था। बरातियों की पिटाई की गई थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचक ने वारदात से चार साल पहले मरे व्यक्ति का धारा 161 (सीआरपीसी) में बयान दर्ज कर लिया। इसके अलावा 20 साल पहले गांव छोड़कर जा चुके व्यक्ति के बयान और शपथपत्र कोर्ट में जमा किए। ट्रायल के दौरान इसका फायदा आरोपियों को मिला। साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपी बरी कर दिए गए।
गोपालपुरा, पिढ़ौरा निवासी चंद्रपाल ने नौ मई 2014 को थाना पिढ़ौरा में तहरीर दी थी। इसमें कहा गया कि आठ मई 2014 को उसकी बेटी की शादी थी। बरात जसवंत नगर के लुधपुरा से आई थी। गांव के दबंग पप्पू उर्फ रामजीत, दिनेश, रामेश्वर, रंजीत और रामू ने ऐलान किया कि दलित की बरात नहीं चढ़ने देंगे। इसका विरोध करने पर आरोपियों ने हमला बोल दिया। बरात पर पथराव किया। बरातियों की पिटाई भी की। पुलिस के पहुंचने पर आरोपी भाग गए।
मरे हुए व्यक्ति के दर्ज किए बयान
पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके विवेचना की। इसमें गांव के हीरालाल के बयान दर्ज किए। उनका शपथपत्र भी लगाया। वादी के अनुसार, हीरालाल गांव में पिछले 20 साल से नहीं रह रहा था। उनका गवाही में नाम और शपथपत्र लगा दिया। घटना से चार साल पहले 12 जून 2010 को मृत दौलतरात का बयान दर्ज कर कोर्ट में चार्जशीट प्रस्तुत कर दी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने प्रस्तुत किया मृत्यु प्रमाणपत्र
स्पेशल जज (एससी-एसटी एक्ट) परवेंद्र कुमार शर्मा की कोर्ट में बलवा, मारपीट और एससी-एसटी एक्ट में मुकदमा चला। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरेश चतुर्वेदी ने मृत दौलतरात का मृत्यु प्रमाणपत्र और हीरालाल का गांव में नहीं रहने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया। अभियोजन की ओर से घटना में घायल हुए किसी व्यक्ति को बयान के लिए कोर्ट में पेश नहीं किया गया। गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास था। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी पप्पू उर्फरामजीत, दिनेश, रामेश्वर, रंजीत और मोनू त्यागी को बरी कर दिया।