फिरोजाबाद जिले में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने हिंदी की बदौलत शहर और देश में ख्याति पाई है। अमर उजाला संवाद में इन लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। इन लोगों का कहना है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हिंदी को सम्मान मिलना चाहिए।
'लाल किले पर सुनाई कविता, छोटे से गांव से यशपाल को मिली पहचान'
गांव कनैटा निवासी यशपाल यश कहते हैं कि मैं गांव का रहने वाला हूं। मगर मेरी पहचान पूरे देश में हैं। लोगों का सपना दिल्ली के लाल किले के मंच तक पहुंचने का होता है। मैं हिंदी की बदौलत ही 2013 में लाल किले के मंच पर पहुंचा।
उन्होंने बताया कि वो जयपुर में गीत चांदनी महोत्सव के मंच पर तीन बार गए हैं। यह सब हिंदी की बदौलत हुआ। लोग हिंदी को लेकर कभी गंभीर नहीं हुए। अन्य भाषाओं से ही प्रभावित होते जा रहे हैं। जबकि हिंदी सफलता के साथ सम्मान भी दिलाती है।