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हिंदीहैंहम : 'हिंदी भाषा की बदौलत देश में रोशन किया नाम, पाया सम्मान'

Sat, 29 Aug 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
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हिंदी हैं हम - फोटो : Amar Ujala
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फिरोजाबाद जिले में कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने हिंदी की बदौलत शहर और देश में ख्याति पाई है। अमर उजाला संवाद में इन लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। इन लोगों का कहना है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। हिंदी को सम्मान मिलना चाहिए। 
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'लाल किले पर सुनाई कविता, छोटे से गांव से यशपाल को मिली पहचान'


गांव कनैटा निवासी यशपाल यश कहते हैं कि मैं गांव का रहने वाला हूं। मगर मेरी पहचान पूरे देश में हैं। लोगों का सपना दिल्ली के लाल किले के मंच तक पहुंचने का होता है। मैं हिंदी की बदौलत ही 2013 में लाल किले के मंच पर पहुंचा।

उन्होंने बताया कि वो जयपुर में गीत चांदनी महोत्सव के मंच पर तीन बार गए हैं। यह सब हिंदी की बदौलत हुआ। लोग हिंदी को लेकर कभी गंभीर नहीं हुए। अन्य भाषाओं से ही प्रभावित होते जा रहे हैं। जबकि हिंदी सफलता के साथ सम्मान भी दिलाती है। 
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500 से ज्यादा लिखी हैं कविताएं

बसंत शर्मा कहते हैं कि हिंदी में मेरी बचपन से ही रुचि रही है। क्योंकि हिंदी भाषा में अपनापन है। 500 से ज्यादा हिंदी में कविताएं लिखीं है। 100 से ज्यादा व्यंग्य भी लिखे हैं। गजल, मुक्तक भी मेरे लिखे हुए हैं। लोग मुझे हिंदी की बदौलत आज जानते हैं। हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार को भी कदम उठाने चाहिए। जैसे कि आदेश किया जाए कि सभी प्रतिष्ठानों पर हिंदी से ही प्रचार प्रसार होगा। प्रशासनिक भाषा भी शत-प्रतिशत हिंदी ही होगी। तब जाकर हिंदी का महत्व बढ़ेगा।

'चार पुस्तकें लिखी हैं और आना बाकी हैं'

कवि चंद कुमार चंद बताते हैं कि हिंदी की बदौलत मुझे शहर और अन्य राज्यों में कई बार सम्मानित हुआ हूं। हिंदी गीत और ब्रज भाषा में मैंने चार पुस्तकें लिखी हैं। कई पुस्तकें प्रकाशित होना शेष हैं। मेरा देश हिंदी भाषी राष्ट्र है। राष्ट्रभाषा का सदैव सम्मान करना चाहिए। मैं हमेशा मंचों से हिंदी का प्रचार-प्रसार करता आया हूं। अन्य भाषा के लोग सिर्फ सफल हो सकते हैं। किंतु हिंदी भाषा के लोग सफल होने के साथ-साथ सम्मान भी पाते हैं। उनको लंबे समय तक याद किया जाता है। ऐसे कई उदाहरण भी हैं।
 
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