यह रेस्टोरेंट अच्छा खाना उपलब्ध कराने के साथ ही महिला सशक्तीकरण का भी अच्छा उदाहरण है। यहां सिर्फ महिलाएं काम करती हैं। ऐसी महिलाएं जो बेरोजगार होने के साथ-साथ टेक्निकल रूप से हुनरमंद नहीं थीं। वह घर में सिर्फ खाना बनाती थीं। आज यह महिलाएं अपने खाना बनाने के गुर से समाज में आत्मसम्मान के साथ जीवनयापन कर रही हैं।
नुक्कड़ में शुरू किया रेस्टोरेंट
नुक्कड़ रेस्टोरेंट चलाने वाली भावना कौर बताती हैं कि एक छोटे से नुक्कड़ से शुरू किया था। आज देखते ही देखते उनके रेस्टोरेंट का खाना लोगों को खूब भी रहा है। नुक्कड़ से शुरू किया इसलिए नुक्कड़ रेस्टोरेंट नाम रख दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति का इलेक्ट्रॉनिक का बिजनेस था। बिजनेस अच्छा नहीं चल रहा था। उसमें घाटा होने लगा और कर्ज बढ़ गया। इसके बाद पति-पत्नी दोनों ने मिलकर एक नुक्कड़ में खाना बनाकर लोगों को खिलाने का काम शुरू किया।
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घरेलू महिलाओं को बना रहीं आत्मनिर्भर
भावना ने बताया कि शुरू में एक-दो लोग आते थे। लेकिन हमने हिम्मत नहीं हारी। दिन रात मेहनत करके रेस्टोरेंट को खड़ा किया। उन महिलाओं को काम दिया, जो कि ना ही प्रोफेशनल कुक हैं और ना ही कोई प्रोफेशनल कोर्स किया है। रेस्टोरेंट में काम करने के लिए घरेलू महिलाओं को रोजगार दिया है। जिन्हें कोई अपने यहां पर काम भी नहीं देता था। उन्हें भावना ने सहारा दिया।
मिलता है घर जैसा भोजन
बताया कि आज लोग हमारे यहां का खाना पसंद कर रहे हैं। इस रेस्टोरेंट में 80 रुपये में घर जैसा सादा भोजन मिलता है। खाना ना ही ज्यादा स्पाइसी होता है और ना ही ज्यादा ऑयली। इसे खा कर लोग घर जैसे खाने का अनुभव करते हैं।