देश का पहला बर्ड फेस्टिवल शुक्रवार को घड़ियालों के घर चंबल सेंक्च्युरी में शुरू हुआ। औपचारिक उद्घाटन शनिवार को होगा। प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण संजीव सरन ने बताया कि फेस्टिवल के दौरान चिड़ियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के संबंध में जो सुझाव आएंगे, उन्हें पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। तीन दिवसीय फेस्टिवल के तहत पहले दिन प्रदेश के 75 जिलों में 300 स्थानों पर भी बर्ड वाचिंग आयोजित की गई।
फेस्टिवल के दौरान प्रमुख सचिव संजीव सरन ने बताया कि मुख्यमंत्री का ‘विजन’ पूरा हो रहा है। संकट में पड़ी चिड़ियों की वंशवृद्धि को लेकर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। लोगों को वाइल्ड लाइफ और पक्षियों के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में एक नेशनल और 13 वन सेंक्च्युरी हैं।
गंगा के 75 किमी के एरिया को टर्टल सेंक्च्युरी घोषित किया गया है। विशेषज्ञ फेस्टिवल के दौरान राज्य पक्षी सारस के संरक्षण और गिद्धों को बचाने के तरीकों पर मंथन कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। बर्ड फेयर के जनक टिम अपलेटन ने कहा कि इंग्लैंड में बर्ड फेयर सदस्यों की संख्या 1.20 लाख है। भारत जैसे बड़े देश में पक्षियों के संरक्षण के लिए बर्ड वाचिंग एरिया विकसित किया जाना चाहिए। पक्षियों पर कई किताबें लिख चुके विक्रम ग्रेवाल ने ऐसे आयोजन हर साल अलग-अलग इलाकों में कराने की सलाह दी। जिम लोरेन्स ने आयोजन को नई सोच बताया। चंबल सफारी के डायरेक्टर आरपी सिंह ने बताया कि चंबल सेंक्च्युरी में 1400 से ज्यादा घड़ियाल हैं।
यहां का ईको सिस्टम बहुत अच्छा है। इस सत्र में निखिल दिवासर, असरद रहमान, अमित गुप्ता आदि ने भी विचार व्यक्त किए। यूपी के ईको टूरिज्म प्रभारी आरके सिंह ने कहा कि चंबल में पक्षियों के बच्चे यहां की धरोहर हैं। दूसरे सत्र में विशेषज्ञों ने संकटग्रस्त चिड़ियों के संरक्षण पर चर्चा की।