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हटेगा जयगुरुदेव आश्रम का अवैध कब्जा, हाईकोर्ट ने किया आगाह न हो डेरा सच्चा सौदा जैसी घटना

Tue, 29 Aug 2017 08:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद/मथुरा
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कोर्ट - फोटो : सांकेतिक चित्र
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) की जमीन से जय गुरु संस्थान को अपना कब्जा हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को भी निर्देश दिया है कि कब्जा हटाने के दौरान डेरा सच्चा सौदा जैसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न होने पाए। इसके लिए पर्याप्त संख्या पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए जाएं। कोर्ट ने जमीन खाली कर नगर निगम को सौंपने का निर्देश दिया है।
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कोर्ट ने यूपीएसआईडीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक को भी निर्देश दिया है कि रिहायशी कालोनी में स्थित पांच पार्कों की जमीनें खाली कराकर उन पर पार्क बहाल किया जाए। यह जमीन यूपीएसआईडीसी ने उद्योगों को आवंटित कर दी है। जिन उद्योगों को जमीनें दी गई हैं उनका आवंटन रद्द कर दूसरी जगह जमीन देने या ब्याज सहित पैसा लौटाने के लिए कहा है। 

राजेंद्र सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की पीठ ने मुख्य सचिव और क्षेत्रीय प्रबंधक से 18 सितंबर को इन आदेशों की अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
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कोर्ट ने कहा कि जयगुरुदेव संस्थान को एक सप्ताह में कारण बताओ नोटिस दिया जाए और उसके एक सप्ताह के जितनी भी जमीन पर अवैध कब्जा है उसे खाली कराकर स्थानीय नगर निगम को कब्जा सौंप दिया जाए। अवैध कब्जे की शिकायत पन्नापुर और माहौली में की गई है। इन दोनों गांवों की जमीनें औद्योगिक विकास के लिए अधिग्रहीत की गई थी।
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अनुच्छेद 21 का दिया हवाला

यहां उद्योगों के साथ रिहायशी कालोनी बनाने का भी प्रस्ताव है। प्लान के अनुसार रिहायशी इलाके में पांच पार्क बनाने का प्रस्ताव था मगर यूपीएसआईडीसी ने पार्क की जमीन उद्योगों को आवंटित कर दी और पार्क दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय लिया। जहां पार्क शिफ्ट किया जा रहा है वहां जयगुरुदेव के अनुयायियों ने कब्जा कर रखा है।

याचिका दाखिल कर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने और पार्कों को बहाल करने की मांग की गई। खंडपीठ ने सुप्रीमकोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि आम जनता को स्वच्छ हवा पाने का अधिकार है। यह जीवन जीने के अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत आता है। पार्क की जमीन उद्योगों को नहीं दी जा सकती है और न ही पार्क के स्वरूप से कोई छेड़छाड़ की जा सकती है।
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