सिविल एयरपोर्ट की स्थापना की उम्मीद लगाए आगरावासियों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। आगरा से एयरपोर्ट के वादे ही किए जाते रहे लेकिन केंद्र सरकार ने शनिवार को ग्रेटर नोएडा के पास जेवर में अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट की मंजूरी दे दी। ऐसे में आगरावासी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
बता दें कि विश्वप्रसिद्ध स्मारक ताजमहल के शहर आगरा में एयरपोर्ट की मांग काफी पुरानी है। यहां पर खेरिया स्थित एयरपोर्ट भारतीय वायु सेना के अधीन है। ऐसे में यहां एयरपोर्ट के सिविल टर्मिनल के लिए मांग लगातार उठ रही है। सरकारें बदलने के लिए साथ आगरा से एयरपोर्ट के वादे भी किए जाते रहे हैं लेकिन यह पूरा होना अब नामुमकिन ही लग रहा है।
बीते अप्रैल माह में आगरा में आयोजित डिजिधन मेले में आए केंद्रीय पर्यटन मंत्री डा. महेश शर्मा ने अमर उजाला से खास बातचीत में कहा था कि आगरा में यूनेस्को की तीन धरोहर हैं। ऐसे में आगरा को पर्यटन विकास का बड़ा चेहरा बनाने का केंद्र और राज्य सरकार प्रयास करेगी। मोदी-योगी मिलकर आगरा के विकास की योजना बना रहे हैं। एयरपोर्ट, बैराज, रेलवे स्टेशन, फतेहपुर सीकरी और ताजमहल के पास के हालात बदलने की योजना बन चुकी है।
इसके बावजूद शनिवार को ग्रेटर नोएडा के पास जेवर में एयरपोर्ट के सिविल टर्मिनल की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। इसे आगरा की उम्मीदों को झटका माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जेवर में एयरपोर्ट बनने के बाद आगरा में इसकी उम्मीद ना के बराबर है।
आगरा के व्यापारियों का कहना है जूता उद्योग और पेठा नगरी के लिए जाने जाने वाले आगरा को एयरपोर्ट का तोहफा न देना केंद्र सरकार का ताजनगरी से धोखा है। ताजमहल होने के कारण आगरा विश्व भर के लिए पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में ये आगरा का हक छीनकर जेवर को यह तोहफा देना केंद्र सरकार की नाइंसाफी है।