आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज को 'एम्स' की तरह विकसित करने के लिए 17 भवन ध्वस्त कर नया रूवरूप दिया जाएगा। सात नई मल्टी स्टोरी इमारतों में विभाग स्थापित किए जाएंगे। 167 साल पुराना पुस्तकालय और प्रमुख अधीक्षक कार्यालय संरक्षित किए जाएंगे।
एसएन के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि एसएन के 24 एकड़ और लेडी लॉयल के 20 एकड़ को मिलाकर मल्टीस्टोरी इमारतें बनेंगी। इनमें ही सभी विभाग स्थापित होंगे, इससे काफी जगह मिलेगी, जिसमें हरियाली विकसित होगी। 17 भवनों को तोड़ा जाएगा।
घड़ी वाली इमारत, इमरजेंसी और सात मंजिला इमारत पर तोड़ने पर अभी निर्णय नहीं हुआ। पुस्तकालय और प्रमुख अधीक्षक कार्यालय को सहेजा जाएगा, यह इमारतें कॉलेज की स्थापना के समय हैं और 167 साल पुरानी हैं।
केंद्रीय पुस्तकालय
- फोटो : अमर उजाला
यह भवन तोड़े जाएंगे
नर्सेज क्वार्टर, डॉक्टर्स क्वार्टर, लेडी लॉयल हॉस्पिटल, इलेक्ट्रिक सबस्टेशन, जनरल स्टोर, पंप रूम, इलेक्ट्रिक पैनल रूम, अस्पताल के सीएमओ कार्यालय, प्राइवेट वार्ड, पीजी गर्ल्स हॉस्टल-गर्ल्स हॉस्टल, एसिक रजीडेंस, वक्ष एवं क्षय रोग, मेटरनिटी होम, पुराना स्त्री रोग विभाग, बाल रोग विभाग, हौसला काम्प्रहेंसिव ट्रैनिंग सेंटर, योगा एंड आयुर्वेद मेडिसिन।
सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज का इतिहास
- वर्ष 1854 में ईस्ट इंडिया कंपनी के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर जेम्स थॉमसन ने इसकी नींव रखी। इसका नाम थॉमसन हॉस्पिटल रखा गया।
- यहां सेना के डॉक्टर प्रेक्टिस करते थे। 1857 में भारतीय चिकित्सकों का पहला बैच पास आउट हुआ।
- सर्जन डॉ. जॉन मरे पहले प्रधानाचार्य थे, जो 1854 से 1858 तक यहां रहे। 1872 से सिविलियंस प्रवेश लेने लगे।
- 1939 में यह पूरी तरह से मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित हुआ।
- 1944 में एमबीबीएस का पहला बैच पास हुआ, जिसे आगरा विश्वविद्यालय से डिग्री दी गई।
- 1947 में भारत कोकिला और प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल सरोजनी नायडू के नाम पर इस मेडिकल कॉलेज का नाम रखा गया।
- 1948 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से संबद्ध हुआ।