अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में स्नान क रने के लिए भक्तों की भीड़ रविवार रात को ही राधाकुंड मेले में पहुंच गई। मान्यता के अनुसार भक्तों ने रात 12 बजे राधाकुंड-श्याम कुंड के संगम स्थल पर स्नान किया और चंद्र दर्शन कर पेठे का फल कुंड के जल में प्रवाहित किया।
स्नान करने वालों में संतान प्राप्ति की चाह रखने वाले दंपती की संख्या अधिक थी। ऐसा माना जाता है कि इस अष्टमी पर कुंड में स्नान करने से संतान सुख मिलता है। उधर, कुंड, मंदिर और मठों में विवाहित जोड़े पूजा-अर्चना करते दिखे।
अहोई अष्टमी पर मध्य रात महिलाओं ने अहोई देवी की पूजा कर व्रत शुरू किया। परंपरा के तहत कुंड में स्नान कर पूजा की गई। सेवायत पंडित नंदकिशोर गोस्वामी ने बताया कि इस खास दिन पर कुंड में स्नान के लिए मणिपुर, बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान आदि से हर साल कई दंपती आते हैं।