श्रद्धा के साथ मनाई गई अहोई अष्टमी
मथुरा में सुबह महिलाओं ने बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखा और शाम के समय तारों को जल अर्पित करके व्रत खोला। इस अवसर पर महिलाओं ने दीवार पर आठ कोनों वाली एक पुतली बनाई। पुतली के पास ही स्याउ माता व उनके बच्चे बनाए।
मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की उम्र लंबी होती है। आचार्य श्यामदत्त चतुर्वेदी ने बताया कि अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने बच्चों की आयु और स्वास्थ्य के लिए व्रत रखती हैं। इस व्रत को दीपावली की शुरुआत भी माना जाता है।