अग्रबंधु समन्वय समिति के पूर्व अध्यक्ष विष्णु कुमार अग्रवाल ने अपने खिलाफ लगे गबन, धोखाधड़ी और कूटरचना के आरोपों को निराधार बताते हुए पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि संस्था के बैंक खाते से रकम निकालने के लिए कम से कम दो हस्ताक्षर जरूरी थे, इसलिए वह अकेले धन नहीं निकाल सकते थे।
आगरा में अग्रबंधु समन्वय समिति से जुड़े विवाद में पूर्व अध्यक्ष विष्णु कुमार अग्रवाल ने अपने खिलाफ लगे गबन के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें बदनाम करने के लिए भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए गए हैं।
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अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2004 में गठित संस्था का नवीनीकरण न होने पर 2019 में नई संस्था पंजीकृत हुई थी। वर्ष 2024 तक वैध नवीनीकरण प्रकाश चंद्र अग्रवाल, रमाशंकर अग्रवाल और तारा चंद मित्तल ने कराया था। वह 19 अप्रैल से 26 अगस्त 2024 तक अमेरिका में थे। इससे नवीनीकरण में उनका कोई योगदान नहीं था।
उनके खिलाफ 27 सितंबर 2025 को थाना कमला नगर में धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दायर रिट याचिका पर अदालत ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। उन्होंने बताया कि संस्था के बैंक खाते से निकासी के लिए कम से कम दो हस्ताक्षर अनिवार्य थे। इसलिए वह अकेले खाते से रकम नहीं निकाल सकते थे। उन्होंने आरोपों को झूठा बताते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।