आगरा के कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का ट्रायल जनवरी से शुरू करने की तैयारी है। प्लांट में कचरे से 25 मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना है और मशीनरी लगाने का काम दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
आगरा के कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर प्रदेश के पहले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में जनवरी से कूड़े से बिजली बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इसका ट्रायल तीन महीने तक चलेगा। कुबेरपुर में स्पार्क ब्रासन की ओर से बनाए जा रहे प्लांट में प्रशासनिक भवन के बाद मशीनरी लगाने का काम जारी है जो दिसंबर तक पूरा हो जाएगा।
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करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में 25 मेगावाट बिजली बनाई जाएगी, जिसके लिए जनवरी से ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर कूड़े के पहाड़ हटाने के बाद यहां कचरे से बिजली बनाने का प्लांट लगाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के अनुमति मिलने के बाद करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। स्पार्क ब्रासन कंपनी यह प्लांट लगा रही है जो प्रदेश में पहला है।
नगर निगम के पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि बॉयलर लगाने के साथ ही प्लांट का काम 80 फीसदी तक पूरा हो गया है। इनके इंटीग्रेशन का काम दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मशीनरी लगाने के काम में जुटी है। अप्रैल तक प्लांट का लोकार्पण किया जाना है।
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नहीं दिखेंगे कचरे के पहाड़
शहर में हर दिन 900 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इससे 25 मेगावाट बिजली हर दिन बनाने की योजना है। विद्युत नियामक आयोग को इस प्लांट से मिलने वाली बिजली के लिए आवेदन किया गया है। इस प्लांट के शुरू होने के बाद कचरे के पहाड़ नहीं लगेंगे। हर दिन कचरा बिजली बनाने में खप जाएगा। नगर आयुक्त संतोष कुमार वैश्य ने बताया कि प्लांट की क्षमता 35 मेगावाट तक होगी। उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से कहा है कि मशीनरी लगाने का काम जल्द पूरा करें ताकि ट्रायल शुरू हो सके। कचरा प्रबंधन का यह मॉडल पूरे देश में आगरा की शान को बढ़ाएगा।