पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि गिरोह के सरगना राजस्थान के मारवाड़ से गोवंश को चरवाहा बनकर ले जाते थे। सुनसान स्थान पर अपने डेरे जमा देते थे। बड़ी संख्या में गाय डेरा में एकत्रित हो जाती थी, तब रामपुर और मुरादाबाद के गो तस्करों से संपर्क करके गोवंश को कंटेनरों से पश्चिम बंगाल, बिहार, हरियाणा के मेवात में ले जाते थे। एक गोवंश की कीमत तकरीबन 15 हजार रुपये होती थी, जबकि गोकशी से 50 हजार रुपये तक मीट विक्रेता की कमाई होती थी।
30 घंटे के ऑपरेशन में 14 गिरफ्तार
गिरोह के सदस्यों को फिरोजाबाद, इटावा और मथुरा में भी पुलिस ने पकड़ा। 30 घंटे में पुलिस ने तीन जिलों से 14 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर 255 गोवंश को मुक्त कराया। मथुरा के बलदेव थाना क्षेत्र से नौ गो तस्कर से 193 गाय बरामद की गईं, जबकि फिरोजाबाद में दो गो तस्करों को गिरफ्तार कर 62 गायें बरामद कर लीं। इटावा में पुलिस की घेराबंदी देखकर गोकश दो कंटेनर छोड़कर भाग गए।
यह रही टीम
पुलिस टीम में थाना सिकंदरा के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार, क्रिमिनल इंटेलीजेंस विंग प्रभारी इंस्पेक्टर कमलेश सिंह, एसओजी प्रभारी कुलदीप दीक्षित, एसआई मोहित कुमार, एसआई अमित कुमार, एसआई विनीत पंवार, एसआई हरीश चौधरी आदि हैं।
मथुरा की बलदेव पुलिस ने मुरादाबाद निवासी आसिफ, अलवर निवासी रंगड़िया, जयपुर निवासी रामकुमार, मुकेश, अर्जुन, राजू, धर्मा, मुकेश और विजय को गिरफ्तार किया है। फिरोजाबाद पुलिस ने अजमेर निवासी मदन और रंगड़िया पुत्र दुर्गा निवासी थाना कैंकड़ी (अजमेर) को जेल भेजा है।
पुलिस सत्यापन के बाद ही जाने देगी चरवाहे
एसएसपी ने बताया कि प्रदेश में फसल कटाई और बारिश के मौसम में राजस्थान की ओर से चरवाहे अपनी गायों को लेकर आते हैं। यह राजस्थान से आगरा और मथुरा की सीमा में प्रवेश करते हैं। गोतस्कर इसी का फायदा उठाते थे। पुलिस के पकड़ने पर कहते थे कि पशुओं को चारा खिलाने आए हैं। गो तस्करों के इस गैंग के पकड़े जाने के बाद तय किया गया है कि राजस्थान की ओर से आने वाले हर चरवाहे की पहचान और उनका सत्यापन कराया जाएगा।