डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर में तैयार हो रही सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटल फेसिलिटी (सीआईएफ) लैब से अब शहर में भी रिसर्च का रास्ता खुलने जा रहा है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस यह लैब प्रदेशभर के शोधार्थियों के लिए वरदान साबित होगी। सैंपल जांच के लिए बाहर भेजे जाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी।
कुलपति प्रो. आशु रानी ने बताया कि यह लैब इंस्टीट्यूट ऑफ बेसिक साइंस में बनाई जा रही है। कई उन्नत उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं। ये उपकरण विभिन्न मटेरियल्स की संरचना, सतह और रासायनिक गुणों का सटीक विश्लेषण करने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त एचपीएलसी (उच्च प्रदर्शन द्रव क्रोमैटोग्राफी) उपकरण विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग, छलेसर कैंपस में स्थापित किया गया है। आने वाले समय में इस सेंट्रल लैब में और भी कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए जाएंगे, जिससे इसकी क्षमता और बढ़ेगी।
कुलपति ने बताया कि परियोजना को केंद्र सरकार की पीएम ऊषा (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान) और रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) योजनाओं के तहत प्राप्त फंड से विकसित किया गया है। लैब में ठोस और तरल दोनों प्रकार के सैंपल्स की जांच विभिन्न तापमान और परिस्थितियों में हो सकेगी, जिससे शोध कार्य अधिक सटीक और प्रभावी बनेगा। अब तक आगरा के छात्रों को इंदौर जाकर अपने सैंपल्स की जांच करानी पड़ती थी, लेकिन इस लैब के शुरू होने के बाद यह सभी सुविधाएं आगरा में मिलेंगी।
शोधार्थियों के लिए खुली सुविधा
डीन रिसर्च प्रो. बीपी सिंह ने बताया कि इस सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटल फेसिलिटी का लाभ सिर्फ विश्वविद्यालय के छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के किसी भी कॉलेज या विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं यहां आकर अपने शोध सैंपल्स की जांच करा सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि शोध कार्य की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।