शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों के अंदर वायु गुणवत्ता अधिक खराब
| स्कूल |
पीएम-10 |
पीएम-2.5 |
पीएम-1.0 |
ब्लैक कार्बन |
| ग्रामीण क्षेत्र के सड़क किनारे स्थित |
423.52 |
183.95 |
145.38 |
9.01 |
| ग्रामीण क्षेत्र के आवासीय क्षेत्र स्थित |
257.89 |
153.4 |
127.72 |
5.42 |
| शहर के सड़क किनारे स्थित |
346.69 |
163.64 |
132.86 |
6.63 |
| शहर के आवासीय क्षेत्र स्थित |
279.45 |
133.69 |
106.86 |
4.95 |
नोट : आंकड़े माइक्रोग्राम/प्रति क्यूबिक मीटर है।
अंदर का वायु प्रदूषण अधिक खतरनाक
अंदर का वायु प्रदूषण बाहरी परिवेश की अपेक्षा दो से तीन गुना अधिक खतरनाक है। लोग अपना 80 से 90 फीसदी समय घर, कार्यालय, स्कूल या अन्य परिसर के अंदर बिताते हैं।
अस्थमा व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं
शोध कार्य के निर्देशक प्रोफेसर अजय तनेजा ने बताया कि पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में केमिकल (मेटल व ऑर्गेनिक्स) होते हैं। शरीर में पहुंचने के बाद नुकसान पहुंचाते हैं। अवधि के अनुरूप एलर्जी, थकान, सिरदर्द, नाक बहना, खांसी आने के साथ अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारी हो सकती है। बच्चों के सांस लेने का औसत करीब डेढ़ गुना अधिक होता है। उनको अधिक नुकसान पहुंच सकता है।
स्कूलों के अंदर प्रदूषण कम करने के उपाय
- स्कूल के कमरे हवादार होने चाहिए। यहां बच्चे अधिकतर समय बिताते हैं।
- स्कूल के आसपास हरियाली अधिक होनी चाहिए, जिससे धूल न आए।
- कक्षा की सफाई स्कूल खुलने के करीब एक घंटे पहले हो जानी चाहिए, जिससे धूल सतह पर बैठ पाए।
- स्कूल के बाहर पानी का छिड़काव कर सकते हैं।
- कक्षा में सीमित संख्या में विद्यार्थी बैठाने चाहिए।