प्लेसमेंट सेल के सह प्रभारी प्रो. अनिल गुप्ता ने बताया कि अभी तक रोजगार मेले नहीं लगते थे, बीते सत्र से इसकी शुरूआत की है और एक सत्र में 417 को नौकरी दी। इसमें एक छात्र को प्रति महीने 1.20 लाख रुपये वेतन पर नौकरी मिली।
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं को उड़ान के 'पर' देने में फिसड्डी साबित हो रहा है। विद्यार्थी चाहते हैं कि डिग्री मिलने से पहले ही उसी संस्थान के कैंपस इंटरव्यू में उन्हें अच्छी नौकरी मिल जाए। पर, यहां का प्लेसमेंट सेल उनके अरमान पूरे नहीं कर पा रहा। बीते साल विश्वविद्यालय में 99 हजार विद्यार्थी पास हुए लेकिन नौकरी केवल 417 के ही हाथ लग सकी। यही आंकड़ा 5 साल के दायरे में और भी सिमट जाता है।
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विश्वविद्यालय के 57 पाठ्यक्रम में स्नातक और परास्नातक में 3608 छात्र-छात्राएं पढ़ रहे हैं। बीते साल यहां से स्नातक और परास्नातक के करीब 99 हजार छात्र पास हुए। प्लेसमेंट सेल की ओर से रोजगार मेला लगा लेकिन उसमें केवल 1198 विद्यार्थी शामिल हुए। कहा गया कि सभी संकाय के विद्यार्थियों को आमंत्रित नहीं किया गया। विभिन्न कंपनियों के प्रतिनिधियों ने साक्षात्कार में केवल 417 को ही मौके पर ऑफर लेटर दिया। इससे पहले बीते चार सत्रों में महज 108 को ही नौकरी मिली। हालांकि इनमें से 10 से 15 ऐसे छात्र भी रहे, जिन्होंने कंपनियों की शर्तें मंजूर नहीं होने पर नौकरी ज्वाइन नहीं की। यहां बीते पांच साल में प्लेसमेंट सेल के जरिये महज 525 छात्र-छात्राओं को ही नौकरी मिल पाई है, जबकि हर साल औसतन 99 हजार छात्र यहां से पास हो रहे हैं। इस सत्र में अभी एक भी रोजगार मेला भी नहीं लगा है।
बीते सत्र से मेले में बढ़ रही संख्या
प्लेसमेंट सेल के सह प्रभारी प्रो. अनिल गुप्ता ने बताया कि अभी तक रोजगार मेले नहीं लगते थे, बीते सत्र से इसकी शुरूआत की है और एक सत्र में 417 को नौकरी दी। इसमें एक छात्र को प्रति महीने 1.20 लाख रुपये वेतन पर नौकरी मिली। इस सत्र से और नामी कंपनियों को रोजगार मेेले में बुलाएंगे।
नामी कंपनी नहीं आती
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष सतीश सिकरवार का कहना है कि बीते साल लगे रोजगार मेले में सामान्य कंपनियां आईं थी, अधिकांश 8-10 हजार रुपये वेतन तक ही दे रही थीं। वह भी शहर से बाहर। इतने कम वेतन के कारण छात्रों ने नौकरी नहीं की। इसके बेहतर संचालन के लिए ज्ञापन देकर प्रदर्शन भी कर रहे हैं।