डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का ऑनलाइन सिस्टम मददगार साबित नहीं हो रहा। यहां डिग्री के लिए आवेदन करने पर भी महीनों चक्कर काटने पड़ रहे हैं। कई ऐसे भी हैं, जिनकी नौकरी लग गई है और डिग्री की जरूरत है। घर डिग्री नहीं पहुंचने पर विश्वविद्यालय भटकने को मजबूर हैं। विश्वविद्यालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों के सत्र 2015 से पहले की डिग्रियां लंबित हैं।
विवि में करीब पांच हजार आवेदन डिग्री के लिए आए। आवेदन के तीन महीने में डिग्री घर पहुंचाने की व्यवस्था है, लेकिन इसका अमल नहीं हो पा रहा। ऑनलाइन आवेदन करने के बाद भी छात्रों को विश्वविद्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इनमें कई लोगों की नौकरी भी लग चुकी है, इसके लिए वास्तविक डिग्री की जरूरत है। लगातार चक्कर काटने पर भी उनकी सुनवाई नहीं हो पा रही। विश्वविद्यालय के जन संपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर ने बताया कि 2015 सत्र से पहले की लंबित डिग्रियों के आवेदन की सूची बनवाकर इनको तैयार कराया जा रहा है, कुछ में कानूनी मामले के चलते देरी हो रही है।
केस एक: हर महीने लगाने पड़ रहे चक्कर
फिरोजाबाद के चंदन सिंह ने बताया कि बीएससी 2010 सत्र की डिग्री है। इसके लिए बीते साल दिसंबर में ऑनलाइन आवेदन किया था। छह महीने से अधिक समय हो गया, लेकिन डिग्री घर नहीं पहुंची। नौकरी लग गई है, लेकिन डिग्री के लिए हर महीने एक से दो चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
केस दो: आवेदन किए चार महीने हुए
मथुरा के विनोद चौधरी ने बताया उनके भाई दिनेश की सरकारी नौकरी कर रहे हैं, बीएड की प्रोविजन डिग्री लगा दी थी, अब वास्तविक डिग्री की जरूरत पड़ रही है। आवेदन किए चार महीने से अधिक समय हो गया, यहां आने पर चक्कर काट रहे हैं और किराया भी खर्च हो रहा है।
केस तीन: नौकरी के लिए चाहिए डिग्री
अलीगढ़ के ओमकार स्वरूप सक्सेना ने बताया कि उनकी बेटी की एमए 2013 की डिग्री है, इसके लिए बीते साल नवंबर में ऑनलाइन आवेदन किया था। कई बार बेटी चक्कर लगाकर परेशान हो गई, निजी कंपनी में नौकरी के लिए साक्षात्कार देने गई तो डिग्री दिखाने के लिए कहा।