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यूं ही आगरा विश्वविद्यालय घोटालों के लिए बदनाम नहीं हुआ, अफसरों ने अपनी जेब भरने लगाया पलीता

Wed, 05 Sep 2018 01:25 PM IST
चंद्रमोहन शर्मा, अमर उजाला, आगरा
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आगरा यूनिवर्सिटी - फोटो : SELF
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आगरा का डा. बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी घोटालों के लिए यूं ही बदनाम नहीं हुआ। विश्वविद्यालय के अफसरों ने ही इसकी साख को पलीता लगाया है। विजिलेंस की जांच रिपोर्ट देखें तो पता चलता है कि कुलपति रहे डीएन जौहर और मौहम्मद मुजम्मिल समेत 16 अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी जेबें भरने के लिए छात्रों का भविष्य चौपट कर दिया। ऐसी फर्म को मार्कशीट और ओएमआर शीट बनाने का ठेका दिया जिसकी दिलचस्पी काम करने में नहीं बल्कि पैसा बंटोरने में थी। नतीजा यह हुआ कि मार्कशीट नहीं बन पाईं।

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यह घोटाला 2012 और 2013 का है। तब के छात्र अभी तक अपनी मार्कशीट और डिग्री हासिल करने के लिए विश्वविद्यालय के चक्कर काट रहे हैं। हालांकि यह अकेला घोटाला नहीं है। विवि. में और भी गोलमाल हुए हैं। 2004 में तो बीएड की 8000 सीटें होने के बावजूद 12000 मार्कशीट बांट दी गई। इस घोटाले की जांच एसआईटी कर रही है। इसमें 30 तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की गर्दन फंसी हुई है।

घोटाला नंबर- 1- चहेती फर्म को तीन गुना महंगे दाम पर दिया काम

विजिलेंस की पहली खुली जांच में पाया गया कि 2012 में बंगलुरू की माइंडलॉस्टिक इंफ्राटेक लिमिटेड फर्म को परीक्षा संबंधी कार्य का ठेका दिया गया। इसे ओएमआर शीट मिलाकर 56 रुपये प्रति अंकतालिका की दर से काम मिला जबकि यह काम करने के लिए अन्य फर्म 18 रुपये की दर से तैयार थीं। तीन गुना दर पर माइंडलॉजिक्ट को ठेका दिया गया। उस समय कुलपति डीएन जौहर थे। वित्त्त अधिकारियों ने आपत्त्ति की लेकिन उन्होंने कहा कि अच्छा काम तो महंगा ही होगा। उनके बाद कुलपति बने मौहम्मद मुजम्मिल तो उनसे भी चार कदम आगे रहे। इस फर्म ने काम पूरा नहीं किया। इसके बावजूद नई फर्म को ठेका नहीं दिया। उसी फर्म का ठेका एक साल और बढ़ा दिया। उसके सारे भुगतान भी कर दिए।

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घोटाला नंबर - 02- बगैर टेंडर के खरीदे 3.5 लाख के कूलर 

यह भी अजब घोटाला रहा। विजिलेंस की खुली जांच में पाया गया कि  3.5 लाख खर्च करके 30 कूलर खरीदे गए। नियम यह है कि एक लाख से अधिक का सामान खरीदने के लिए टेंडर निकाला जाए। 3.5 लाख के लिए कोई टेंडर नहीं निकाला गया। एमजी रोड की फर्म एमएस वेब को कूलर सप्लाई का ठेका दिया गया।

घोटाला - 03- बगैर टेंडर खरीदा 21 लाख का फर्नीचर 

यह घोटाला कूलर खरीद घोटाले का पार्ट - 2 था। इसमें 21 लाख का फर्नीचर खरीदा गया। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। बाद में यह भी बात आई कि फर्नीचर घटिया क्वालिटी का खरीदा गया। जो सोफा शीशम की लकड़ी का बताया गया, उसमें आम की लकड़ी लगाई गई। इसकी सप्लाई का ठेका आवास विकास के बालेश त्रिपाठी की फर्म मोहन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।

कब-कब, क्या-क्या

-। 2012 से 2013 के दौरान किए गए तीन घोटाले।
-। 2014 में दिए गए थे विजिलेंस की खुली जांच के आदेश।
-। चार साल की जांच के बाद अब दर्ज कराया गया केस।

 इन धाराओं में मुकदमा

आगरा में गबन की धारा 409, धोखाधड़ी की 420, षड्यंत्र की 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया गया है। एसपी सिटी प्रशांत वर्मा ने बताया कि जांच विजिलेंस के अधिकारी ही करेंगे।
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