यह भी अजब घोटाला रहा। विजिलेंस की खुली जांच में पाया गया कि 3.5 लाख खर्च करके 30 कूलर खरीदे गए। नियम यह है कि एक लाख से अधिक का सामान खरीदने के लिए टेंडर निकाला जाए। 3.5 लाख के लिए कोई टेंडर नहीं निकाला गया। एमजी रोड की फर्म एमएस वेब को कूलर सप्लाई का ठेका दिया गया।
घोटाला - 03- बगैर टेंडर खरीदा 21 लाख का फर्नीचर
यह घोटाला कूलर खरीद घोटाले का पार्ट - 2 था। इसमें 21 लाख का फर्नीचर खरीदा गया। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। बाद में यह भी बात आई कि फर्नीचर घटिया क्वालिटी का खरीदा गया। जो सोफा शीशम की लकड़ी का बताया गया, उसमें आम की लकड़ी लगाई गई। इसकी सप्लाई का ठेका आवास विकास के बालेश त्रिपाठी की फर्म मोहन एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था।
कब-कब, क्या-क्या
-। 2012 से 2013 के दौरान किए गए तीन घोटाले।
-। 2014 में दिए गए थे विजिलेंस की खुली जांच के आदेश।
-। चार साल की जांच के बाद अब दर्ज कराया गया केस।
इन धाराओं में मुकदमा
आगरा में गबन की धारा 409, धोखाधड़ी की 420, षड्यंत्र की 120 बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया गया है। एसपी सिटी प्रशांत वर्मा ने बताया कि जांच विजिलेंस के अधिकारी ही करेंगे।